Crop Insurance (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया) 
यवतमाल

फसल बीमा से वंचित यवतमाल के किसानों ने उठाए सवाल, पारदर्शी जांच की मांग

Fasal Bima Yojana: यवतमाल जिले के हजारों किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभ से वंचित होने का आरोप लगा रहे हैं। किसानों ने निष्पक्ष जांच कर पात्र किसानों को न्याय दिलाने की मांग की है।

आंचल लोखंडे

Yavatmal Crop Insurance: कृषि प्रधान के रूप में पहचाने जाने वाले यवतमाल जिले के हजारों किसान आज भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं, बेमौसम बारिश, सूखे जैसी परिस्थितियों और विभिन्न संकटों का सामना करने के बावजूद अनेक किसानों को अपेक्षित बीमा लाभ नहीं मिला है, जिससे जिले भर में नाराजगी का माहौल है। किसानों और कृषि क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, संबंधित मौसम में जिले की उत्पादन क्षमता (आणेवारी) यदि वास्तविक स्थिति से अधिक दर्ज की गई हो, तो उसका सीधा असर फसल बीमा दावों पर पड़ सकता है।

यदि उत्पादन के आधिकारिक आंकड़े अधिक दिखाए गए हों, तो नुकसान का प्रतिशत कम दिखाई देता है, जिसके कारण बीमा राशि कम मिलना या बिल्कुल न मिलना जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विशेष बात यह है कि अब संबंधित मौसम की फसलें खेतों में मौजूद नहीं हैं, इसलिए प्रत्यक्ष पुनर्मूल्यांकन संभव नहीं है। हालांकि, उपग्रह चित्रों, फसल कटाई प्रयोगों की रिपोर्ट, मौसम विभाग के आंकड़ों, राजस्व और कृषि विभाग के अभिलेखों तथा फसल बीमा योजना के अंतर्गत उपलब्ध डिजिटल जानकारी के आधार पर वास्तविक स्थिति की जांच की जा सकती है, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।

फसल बीमा से वंचित किसानों ने उठाए सवाल

जिले के किसान अब शासन और प्रशासन से एक ही मांग कर रहे हैं कि फसल बीमा प्रक्रिया से संबंधित सभी आंकड़े पारदर्शी रूप से सार्वजनिक किए जाएं। उत्पादन क्षमता और फसल कटाई प्रयोगों की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा पात्र किसानों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। यवतमाल जिले के किसान आज शासन और प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। क्या वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कर फसल बीमा लाभ के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा? इस ओर पूरे जिले का ध्यान लगा हुआ है।

पात्र किसानों को लाभ दें

किसान नेता मोरेश्वर वातीले ने कहा कि आज सवाल केवल फसल बीमा का नहीं, बल्कि किसानों को न्याय दिलाने का है। यदि उत्पादन क्षमता या अन्य आंकड़ों के कारण यवतमाल जिले के किसान बीमा लाभ से वंचित रह गए हैं, तो शासन को उपलब्ध सभी अभिलेखों की गहन जांच करनी चाहिए। उपग्रह जानकारी, फसल कटाई प्रयोग, मौसम रिपोर्ट और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाकर पात्र किसानों को तत्काल बीमा मंजूर किया जाना चाहिए। संकट के समय योजनाओं का लाभ मिलना किसानों का अधिकार है, कोई उपकार नहीं।

जन प्रतिनिधि मौन क्यों

सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता बोडेवार ने कहा कि चुनाव के समय किसानों के खेतों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं पर आंसू बहाने वाले सत्ताधारी नेता आज हजारों किसान फसल बीमा से वंचित हैं, तब चुप क्यों हैं? जनप्रतिनिधियों को विधानसभा और संसद में बीमा कंपनियों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए थी। सत्ताधारियों की यह चुप्पी सीधे तौर पर बीमा कंपनियों का समर्थन करने जैसी है और यह यवतमाल के किसानों के साथ बड़ा विश्वासघात है।

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