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यवतमाल के दाते कॉलेज परिसर में मशहूर शेफ विष्णु मनोहर ने 3.5 टन बुढ़ीचा चिवड़ा तैयार कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
यवतमाल में बुढीचा चिवड़ा की शुरुआत वर्ष 1936 में अंजनाबाई रामचंद्र भुजाडे ने की थी।
विशाल आयोजन के लिए दाते कॉलेज मैदान में चिवड़ा बनाने की तैयारी पहले से शुरू कर दी गई थी।
Yavatmal Food Culture: वर्हाड की खाद्य संस्कृति की अनूठी पहचान और यवतमालकरों के दिलों में खास जगह रखने वाले प्रसिद्ध 'बुढीचा चिवड़ा' ने अब विश्व पटल पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। मंगलवार को यवतमाल के दाते कॉलेज परिसर में मशहूर शेफ विष्णु मनोहर ने 3,500 किलो (साढ़े तीन क्विंटल नहीं, बल्कि साढ़े तीन टन) चिवड़ा तैयार कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
एस.एल.फाउंडेशन की पहल और शहर की विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों के सहयोग से इस पारंपरिक व्यंजन को 'वर्ल्ड रिकॉ बुक ऑफ इंडिया' के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया गया। तैयार चिवड़े का नागरिकों, विभिन्न स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं को निःशुल्क वितरण किया गया।
यवतमाल के पारंपरिक स्वाद को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से शेफ विष्णु मनोहर, प्राजक्ता पै और एस.एल. फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने करीब छह महीने पहले इस विश्व रिकॉर्ड का संकल्प लिया था। इसके लिए दाते कॉलेज के मैदान में सोमवार रात से ही चिवड़ा बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई थी।
इस विशाल आयोजन के लिए शनिवार को ही कोराडी से एक विशालकाय कढ़ाई यवतमाल लाई गई थी। इसमें चिवड़ा तैयार करने के लिए करीब 100 से अधिक कर्मचारी दिन-रात जुटे रहे। एस.एल. फाउंडेशन के अध्यक्ष अश्विन सव्वालाखे और उनकी पूरी टीम के अथक प्रयासों से यवतमाल की इस पारंपरिक खाद्य पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
यवतमाल का नाम आते ही यहां के लोगों के मन में सबसे पहले 'बुढीचा चिवड़ा' का ख्याल आता है। आज इसकी एक पुड़िया करीब 20 रुपये में मिलती है, जबकि लगभग 90 साल पहले इसकी कीमत केवल एक आना यानी छह पैसे थी।
बताया जाता है कि अंजनाबाई रामचंद्र भुजाडे ने वर्ष 1936 में यवतमाल के आजाद मैदान में चिवड़ा बेचने की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे इसका स्वाद इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग इसे 'बुढ़ीचा चिवड़ा' कहने लगे। इसके बाद श्रावण रामचंद्र भुजाडे ने इस व्यवसाय को आगे बढ़ाया। तीसरी पीढ़ी में अशोक श्रावण भुजाडे ने इसे घर-घर तक पहुंचाया। वर्तमान में चौथी पीढ़ी के अजय अशोक भुजाडे इस पारंपरिक व्यवसाय को संभाल रहे हैं।
शेफ विष्णु मनोहर अपने अनूठे पाक प्रयोगों और बड़े पैमाने पर व्यंजन तैयार करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने जलगांव के प्रसिद्ध 'वांग्याच्या भरित' यानी बैंगन के भरते से विश्व रिकॉर्ड बनाने की श्रृंखला शुरू की थी। अब तक उनके नाम 33 रिकॉर्ड दर्ज होने की जानकारी दी गई है। अमेरिका के पैनपैक में 34वां रिकॉर्ड बनाने के बाद यवतमाल का 'बुढीचा चिवड़ा' उनका 35वां विश्व रिकॉर्ड बना।