यवतमाल जिले में कम बारिश के कारण आगामी गर्मियों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ी।
जिले के 59 बड़े, मध्यम और लघु जलप्रकल्पों में अपेक्षित जलसंचय नहीं हुआ।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिलहाल इन प्रकल्पों में करीब 70 प्रतिशत जलसंग्रहण है।
इस बार जिले की सभी 16 तहसीलों के लिए जलसंकट निवारण प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
Yavatmal Zilla Parishad Water Plan: यवतमाल जिले में इस वर्ष जिले में बारिश ने दगा दिया है। कम बारिश के चलते सूखे का संकट गहराने लगा है। ऐसे में आगामी गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत की आहट अभी से महसूस होने लगी है।
इस वर्ष अपर्याप्त वर्षा के कारण जलप्रकल्पों में अपेक्षित जलसंचय नहीं हो पाया है। इससे कई गांवों में पेयजल संकट गहराने को आशंका व्यक्त की जा रही है। संभावित संकट की गंभीरता को देखते हुए शासन ने अक्टूबर महीने में ही जलसंकट निवारण कृति प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इसके अनुसार जिला परिषद प्रशासन ने जिले के सभी 16 तहसीलों के लिए नियोजन शुरू कर दिया है। गत वर्ष जहां 15 करोड़ रुपये का नियोजन किया गया था, वहीं इस वर्ष यह प्रारूप 40 करोड़ रुपये के पार जाने की संभावना है।
यवतमाल जिले में इस वर्ष औसत से कम बारिश होने के कारण बड़े, मध्यम और लघु सहित कुल 59 सिंचाई प्रकल्पों में अपेक्षित जलसंचय नहीं हो पाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,
इन प्रकल्पों में फिलहाल लगभग 70 प्रतिशत जलसंग्रहण है। हालांकि, गर्मी तक पानी की मांग बढ़ने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति की चुनौती गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं।
गत वर्ष गर्मी के अंतिम चरण तक पुसद, आर्णी, यवतमाल, चाटंजी और नैर इन पांच तहसीलों के 21 गांवों को टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराना पड़ा था। लगभग 30 हजार नागरिकों के लिए 21 टैंकरों के जरिए 29 पानी आपूर्ति फेरियों का नियोजन किया गया था। इस वर्ष सूखे जैसी स्थिति के कारण टैंकरों की आवश्यकता और बढ़ने की संभावना है।
गत वर्ष आगीं, यवतमाल, पाटंजी, बाभुलगांव, रालेगाव, झारी, उमरखेड, नेर, वणी, दिग्रस, कलब और दारव्हा इन 12 तहसीलों को केंद्र में रखकर जलसंकट नियोजन किया गया था, इस बार जिले की सभी 16 तहसीलों में संभावित जलसंकट को ध्यान में रखकर प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
संभावित जलसंकट से निपटने के लिए नए बोरवेल, कुओं का अधिग्रहण, नल योजनाओं की विशेष मरम्मत तथा उपलब् जलबोलों के पुनर्जीवन जैसे उपाथी को फस्य में शामिल किया जा साहा है।
शहरी क्षेत्रों में भी नगर परिषद और नगर पंचायतों की ओर से पानी बचाने के प्रवास किए जा रहे है। अब प्रशासन का यह वृति प्रारूप कागजों से निकलकर घरातल पर कितनी तेजी से लागू होता है। इसी पर आगामी गमों में जिले के नागरिकों की प्यास बुझेगी या उन्हें टैंकरों के लिए भागदौड करनी पड़ेगी, यह निर्भर रहने वाला है।
यवतमाल जिले में नवंबर महीने में तैयार होने वाले जलसंकट निवारण प्रारूप की प्रक्रिया इस बार एक महीने पहले ही शुरू कर दी गई है। शासन के मार्गदर्शक निर्देशों के अनुसार जिलाधिकारी कार्यालय ने जिला परिषद को जलापूर्ति नियोजन के निर्देश दिए है।
इसके बाद सभी पंचायत समितियों से प्रस्ताव गंगाए गए हैं। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मार्गदर्शन में प्रारूप को अंतिम रूप देने का काम शुरू है। इसे जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।