अकोला में जलसंकट: सीमा वृद्धि क्षेत्रों में 8 दिन में एक बार जलापूर्ति, प्रशासन के खराब नियोजन से जनता बेहाल

Akola Water Crisis News: अकोला शहर में पानी का संकट गहराया है। सीमा वृद्धि क्षेत्रों में 8 दिन में एक बार पानी मिल रहा है, जबकि 2017 के बाद बढ़ी जनसंख्या के अनुसार भंडारण क्षमता नहीं बढ़ाई गई।
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Akola Katepurna Dam Water Supply: अकोला शहर का पानी वितरण तंत्र पूरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है। नागरिकों को तीव्र जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है। शहर के कुछ हिस्सों में तीन दिन के अंतराल पर पानी दिया जा रहा है, तो कहीं पांच से छह दिन बाद ही नलों में पानी पहुंचता है। सबसे चिंताजनक स्थिति शहर के सीमा वृद्धि क्षेत्रों की है, जहां नागरिकों को सप्ताह में केवल एक दिन ही पानी उपलब्ध हो रहा है।

असमान वितरण और कृत्रिम कमीशहर में पानी की मांग अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद नियोजन के अभाव में पानी की बर्बादी होती है। जब वास्तविक आवश्यकता होती है, तब नागरिकों को कृत्रिम जलसंकट झेलना पड़ता है। मनपा के मूल क्षेत्र में 21 जलकुंभ हैं, जबकि शहर की सीमा वृद्धि किए गए क्षेत्र में 14 जलकुंभ मौजूद हैं।

कुल 35 जलकुंभों की भंडारण क्षमता 426 लाख 85 हजार लीटर है। सन 2017 में सीमा वृद्धि के बाद जनसंख्या तेजी से बढ़ी, लेकिन भंडारण क्षमता में कोई वृद्धि नहीं हुई। यही कारण है कि पानी की आपूर्ति पूरी तरह असंतुलित हो गई है। हरिहरपेठ, तोष्णीवाल लेआउट, महाजनी प्लॉट, मराठी लड़कों की स्कूल नं।7, आदर्श कॉलोनी और केशव नगर में तीन दिन के अंतराल पर पानी मिलता है।

रेलवे स्टेशन, बस स्थानक, शिवर और जोगलेकर प्लॉट में चार दिन बाद पानी दिया जाता है। गंगा नगर और लोकमान्य नगर में पांच से छह दिन बाद ही पानी पहुंचता है। शिव नगर जलकुंभ से भी छह दिन के अंतराल पर ही पानी की आपूर्ति होती है।

सीमा वृद्धि क्षेत्रों की दयनीय स्थिति आश्रय नगर, गुडधी, उमरी, मलकापुर और शिवणी जैसे सीमा वृद्धि क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां के जलकुंभों से नागरिकों को सप्ताह में केवल एक दिन ही पानी मिलता है।

बाक्सतकनीकी अड़चन और क्षमता से कम आपूर्ति महान क्षेत्र में 65 एमएलडी और 25 एमएलडी क्षमता के दो जल शुद्धीकरण केंद्र हैं। लेकिन 25 एमएलडी केंद्र को पानी पहुंचाने वाली जलवाहिनियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। परिणाम स्वरूप इस केंद्र से केवल 18 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो रहा है।

दोनों केंद्रों की कुल क्षमता 90 एमएलडी है, जबकि वास्तविक आपूर्ति मात्र 83 एमएलडी तक सीमित है। पाइंटरनियोजन की कमीकाटेपूर्णा बांध में पर्याप्त जलसंग्रहण होने के बावजूद प्रशासनिक नियोजन की कमी ने अकोला शहरवासियों को जलसंकट में धकेल दिया है।

सन 2017 की सीमा वृद्धि के बाद जनसंख्या बढ़ी, लेकिन जलकुंभों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई। परिणाम स्वरूप मूल शहर के 21 और सीमा वृद्धि क्षेत्र के 14 जलकुंभों का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है।