काली दौ. वनपरिक्षेत्र (सौजन्य-नवभारत) 
यवतमाल

नीलगाय का शिकार और वन विभाग का 'मौन', 5 दिन बाद भी हत्यारे फरार, क्या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया मामला?

Nilgai Poaching: काली (दौ.) वनपरिक्षेत्र में नीलगाय का शिकार, 5 दिन बाद भी आरोपी फरार। वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, भ्रष्टाचार और अवैध उत्खनन के गंभीर आरोप।

प्रिया जैस

Illegal Mining Forest Nagpur: वनपरिक्षेत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है। सोमवार देर रात पोखरी-पोहंडूल राज्य मार्ग के किनारे एक जंगली नीलगाय की हत्या कर उसके महत्वपूर्ण अंग और मांस चोरी कर ले जाने की घटना सामने आई है।

घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक वन विभाग को आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इससे काली (दौ।) वनपरिक्षेत्र कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

कार्यालय प्रमुख सम्राट मेश्राम से इस मामले में पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक आरोपियों का कोई ठोस पता नहीं चल सका है। जांच के दौरान आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिनमें एक संदिग्ध ओमनी वाहन इस क्षेत्र से गुजरते हुए दिखाई दिया। हालांकि वाहन का नंबर स्पष्ट न होने के कारण वन विभाग अब तक वाहन और आरोपियों का पता लगाने में असफल रहा है।

कटाई और अवैध खनन की घटनाएं बढ़ी

स्थानीय लोगों का कहना है कि काली (दौ.) वनपरिक्षेत्र में लंबे समय से जंगल कटाई और अवैध खनन की घटनाएं बढ़ रही हैं। क्षेत्र में गौण खनिज तस्कर बड़े पैमाने पर मुरूम और मिट्टी का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। चर्चा है कि कुछ भ्रष्ट कर्मचारी इन गतिविधियों को परोक्ष रूप से संरक्षण दे रहे हैं।

कर रहे अवैध कमाई

सागवान पट्टे में भी ठेकेदारों द्वारा खेतों से सटी वन भूमि के सागवान के पेड़ों की कटाई कर भारी मुनाफा कमाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ राउंड ऑफिसर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और कथित रूप से लाखों रुपये की अवैध कमाई कर रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों का तत्काल तबादला किए बिना क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना मुश्किल बताया जा रहा है।

अब एक बार फिर खुलेआम नीलगाय की हत्या की घटना सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों में रोष है। हैरानी की बात यह है कि घटना की जानकारी वन विभाग को तब मिली, जब स्थानीय लोगों ने राजमार्ग पर रोही का क्षत-विक्षत शव देखकर इसकी सूचना दी। इसके बाद ही वन अधिकारी और उनकी टीम मौके पर पहुँची।

घटना के पाँच दिन बाद भी आरोपियों का कोई सुराग न लगने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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