आईआईटी मुंबई छात्र मौत मामला  (सोर्सः सोशल मीडिया)
यवतमाल

साहिल वाकोडे मृत्यु प्रकरण: वंचित आघाड़ी ने उठाई गहन जांच की मांग, VBA ने CM को सौंपा ज्ञापन

IIT Mumbai Student Death Case: आईआईटी मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध मृत्यु के मामले में वंचित बहुजन आघाड़ी ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।

आंचल लोखंडे

Vanchit Bahujan Aghadi Proest Yavatmal: आईआईटी मुंबई, पवई में शिक्षा ग्रहण कर रहे यवतमाल जिले के होनहार विद्यार्थी साहिल रविंद्र वाकोडे की मृत्यु के मामले में निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच कर जातीय भेदभाव एवं मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की सच्चाई सामने लाने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग वंचित बहुजन आघाड़ी की ओर से की गई है।

इस संबंध में मंगलवार, 22 सितंबर को वंचित बहुजन आघाड़ी के यवतमाल जिलाध्यक्ष, यवतमाल नगर परिषद के गुटनेता तथा नगरसेवक डॉ. नीरज वाघमारे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने निवासी उपजिलाधिकारी अनिरुद्ध बक्षी को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भेजा गया है।

18 सितंबर को हुई थी साहिल की मृत्यु

ज्ञापन में कहा गया है कि साहिल वाकोडे आईआईटी मुंबई के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। 18 सितंबर 2026 को आईआईटी मुंबई के छात्रावास में उसकी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई। परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और चैटजीपीटी के इस्तेमाल का आरोप साहिल पर लगाया गया था।

इसके बाद कुछ ही समय में उसकी मृत्यु होने से कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। साहिल के परिवार ने आरोप लगाया है कि संबंधित प्राध्यापकों तथा संस्था से जुड़े कुछ लोगों की ओर से उसे जातीय अपमान, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव का सामना करना पड़ा। ज्ञापन में इन आरोपों की स्वतंत्र और साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है।

मौत से पहले की घटनाओं की जांच की मांग

वंचित बहुजन आघाड़ी ने मांग की है कि साहिल की मृत्यु से पहले वास्तव में क्या घटनाएं हुईं, उसके साथ किन-किन लोगों ने बातचीत की, क्या उस पर किसी प्रकार का मानसिक अथवा संस्थागत दबाव बनाया गया था, क्या उसे जातीय अपमान या भेदभाव का सामना करना पड़ा था और इन घटनाओं का उसकी मृत्यु से कोई संबंध था या नहीं, इसकी वैज्ञानिक एवं कानूनी पद्धति से जांच की जाए।

ज्ञापन में मामले से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, परीक्षा कक्ष की रिकॉर्डिंग एवं अन्य अभिलेख, प्रवेश-निकास की जानकारी, मोबाइल फोन, लैपटॉप, ई-मेल, मैसेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की गई है। आवश्यकता पड़ने पर इनका फॉरेंसिक परीक्षण कराने की भी मांग की गई।

संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज करने की मांग

साहिल के परिवार के सदस्यों, सहपाठियों, मित्रों, संबंधित प्राध्यापकों, परीक्षा निरीक्षकों, विभागीय अधिकारियों तथा घटना से पहले उसके संपर्क में आए अन्य व्यक्तियों के बयान निष्पक्ष रूप से दर्ज कर जांच का हिस्सा बनाने की मांग की गई है। जांच के दौरान यदि जातीय अपमान, भेदभाव अथवा अनुसूचित जाति के सदस्य के विरुद्ध कानून के अनुसार अत्याचार का मामला सामने आता है, तो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

पूरी सच्चाई समाज के सामने आनी चाहिए

इसके साथ ही साहिल के परिवार को आवश्यक कानूनी सहायता, सुरक्षा और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से की गई। इस अवसर पर डॉ. नीरज वाघमारे ने कहा कि साहिल की मृत्यु केवल उसके परिवार के लिए शोकांतिका नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को आत्ममंथन करने के लिए मजबूर करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के पद, प्रतिष्ठा या संस्था के नाम का प्रभाव जांच पर नहीं पड़ना चाहिए और साहिल की मृत्यु के पीछे की पूरी सच्चाई समाज के सामने आनी चाहिए।

पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित

ज्ञापन सौंपते समय नगरसेविका मीरा वीर, शिवदास कांबले, संजीवकुमार इंगले, शैलेश भानवे, केशव भागवत, रामदास वीर, उत्तम कांबले, बंडू धोटे, शामलता तायडे, अनिता कुनकर, पल्लवी कांबले, करुणा मून, संध्या काली, अलका वाकोडे, धनंजय गायकवाड, सुकेशनी खोब्रागडे, नीता निमकर, आनंद भगत, गौतम वाकोडे, सचिन भवरे, सिद्धार्थ बनसोड, दीपक नगराले, वंदना उरकुडे, बालासाहेब वीर, अभिलाष अंबादास येमले, काशीराम गजभिये, सविता तिडके, संतोष मसाराम, ज्योती लांबे, अर्चना वानखडे और माधुरी देवकते सहित वंचित बहुजन आघाड़ी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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