CIBIL Score Problem For Yavatmal Farmers: यवतमाल जिले में खरीफ सीजन के दौरान बुआई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन किसानों को फसल ऋण समय पर नहीं मिलने से आर्थिक संकट गहरा गया है। खेती के लिए तत्काल धन की आवश्यकता होने पर अधिकांश किसानों ने निजी उधारी, साहूकारों और रिश्तेदारों से पैसे लेकर बुआई पूरी की, लेकिन अब उस उधार को चुकाने के लिए आवश्यक फसल ऋण बैंकों से नहीं मिलने के कारण हजारों किसान आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई सहकारी और अन्य बैंकों द्वारा किसानों के सिबिल (CIBIL) स्कोर तथा पिछले फसल ऋण की बकाया राशि का हवाला देकर नए ऋण आवेदन लंबित रखे जा रहे हैं। किसानों की लगातार शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
इस खरीफ सीजन के लिए जिले को 2,200 करोड़ रुपये के फसल ऋण वितरण का लक्ष्य दिया गया था। हालांकि बुआई लगभग पूरी होने की स्थिति में पहुंचने के बावजूद अब तक केवल 906 करोड़ रुपये, यानी 41.2 प्रतिशत (41.2%) ऋण का ही वितरण हो पाया है।
दूसरी ओर, जिले में 73.82 प्रतिशत (73.82%) बुआई पूरी हो चुकी है, जिससे किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। किसानों की शिकायत है कि कुछ राष्ट्रीयकृत बैंक सिबिल (CIBIL) स्कोर का कारण बताकर फसल ऋण देने से इनकार कर रहे हैं। पांढरकवड़ा तहसील की कुछ बैंक शाखाओं के खिलाफ ऐसी शिकायतें जिला प्रशासन को प्राप्त हुई हैं।
इसके बाद यवतमाल जिला प्रशासन ने संबंधित बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया। जिला कलेक्टर के निर्देश पर नियमों के विपरीत ऋण प्रकरण लंबित रखने वाली कई बैंक शाखाओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इस वर्ष मानसून देर से आने और जून माह लगभग सूखा रहने के कारण किसानों को पहले ही बुआई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। बारिश शुरू होते ही किसानों ने तेजी से बुआई पूरी कर ली, लेकिन समय पर फसल ऋण नहीं मिलने से उन्हें निजी कर्ज का सहारा लेना पड़ा। अब जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या बैंक फसल ऋण वितरण की रफ्तार बढ़ाएंगे।
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| बैंक का नाम | वितरण प्रतिशत (%) |
| जिला सहकारी बैंक | 61.4% |
| कुल फसल ऋण वितरण | 41.2% |
| महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक | 37.8% |
| आईसीआईसीआई बैंक | 26.7% |
| इंडसइंड बैंक | 3.8% |
| आईडीबीआई बैंक | 3.2% |