Yavatmal Bhoodan Land Investigation: यवतमाल के मोहा क्षेत्र में भूदान जमीन के संदिग्ध हस्तांतरण और ले-आउट से जुड़े मामलों की जांच तेज हो गई है। करीब 800 प्लॉटधारकों को राजस्व विभाग नोटिस जारी करने की तैयारी में है। जांच में करीब 75 हेक्टेयर क्षेत्र की 15 जमीनों को एनए किए जाने का रिकॉर्ड सामने आया है, जिनमें 6 मामले ले-आउट से जुड़े बताए जा रहे हैं।
मोहा के 6 ले-आउट अब राजस्व विभाग की जांच के दायरे में हैं। प्लॉटधारकों को नोटिस के बाद उनकी सुनवाई होगी और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यवतमाल के मोहा क्षेत्र में भूदान जमीन के संदिग्ध हस्तांतरण और उस पर विकसित किए गए ले-आउट को लेकर राजस्व विभाग की जांच तेज हो गई है। यवतमाल उपविभागीय अधिकारी गोपाल देशपांडे की निगरानी में चल रही जांच में करीब 75 हेक्टेयर क्षेत्र की 15 जमीनों को अकृषक यानी एनए किए जाने का रिकॉर्ड सामने आया है। जांच और सुनवाई के दौरान इनमें से 6 मामले ले-आउट से संबंधित पाए गए हैं।
अब तक जांच मुख्य रूप से मूल जमीनधारकों और भूदान जमीन के रिकॉर्ड तक सीमित थी। लेकिन राजस्व विभाग ने इन ले-आउट में प्लॉट खरीदने वाले लोगों की जानकारी भी जुटानी शुरू कर दी है। करीब 800 प्लॉटधारकों को स्वतंत्र रूप से नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना जाएगा।
नोटिस जारी होने के बाद एसडीओ कार्यालय में होने वाली सुनवाई को अहम माना जा रहा है। यदि जांच में भूदान जमीन की मूल शर्तों का उल्लंघन, अनधिकृत हस्तांतरण या नियमबाह्य तरीके से एनए प्रक्रिया किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जमीनों के खिलाफ राजस्व कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मोहा के एक मामले में करीब 32 हेक्टेयर भूदान जमीन जिस संस्था को दी गई थी, जांच में सामने आया कि संबंधित मोहा सर्वोदय ग्राम परिवार सहकारी खेती संस्था वर्तमान में अस्तित्व में ही नहीं है। संबंधित रिकॉर्ड में गट क्रमांक 51, 50, 310, 304, 305, 297, 342, 343, 345, 119, 183, 159, 160, 144 और 140 की जमीनों से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं।
जांच में कुछ जमीनों को अकृषक अनुमति और कुछ को सनद दिए जाने का रिकॉर्ड मिला है। बताया गया है कि यह प्रक्रिया वर्ष 2012-13 के दौरान हुई थी। अब भूदान यज्ञ मंडल से उपलब्ध जमीनों की सूची के आधार पर राजस्व प्रशासन पुराने रिकॉर्ड की दोबारा जांच कर रहा है।
यवतमाल जिले की विभिन्न तहसीलों में 6,500 हेक्टेयर से अधिक भूदान जमीन दर्ज है। यवतमाल उपविभाग में जांच तेज है, जबकि अन्य क्षेत्रों में प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी बताई जा रही है। रालेगांव उपविभाग में भी दो मामले सामने आए हैं, जहां संबंधित जमीनों को दोबारा वर्ग-2 करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।