बेंबला डैम (फोटो नवभारत)
यवतमाल

बारिश ने तोड़ा लंबा ब्रेक, यवतमाल में रिमझिम से किसानों के चेहरे खिले; पर खेतों को अब भी तेज बारिश की आस

Farmers Await For Heavy Rain: यवतमाल में दो सप्ताह बाद 22-23 अगस्त को रिमझिम बारिश हुई, जिससे किसानों को राहत मिली। खरीफ फसलों पर कीट प्रकोप के बीच अब जोरदार बारिश का इंतजार है।

आलोक उमाकृष्ण

Yavatmal Farmers Await For Heavy Rain: बीते दो सप्ताह से अधिक समय से जिले में बारिश ने लंबा ब्रेक लिया था। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी और खरीफ फसलों के भविष्य को लेकर वे परेशान थे। बारिश के इस अंतराल के कारण फसलों पर विभिन्न कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ गया था।

हालांकि 22 और 23 अगस्त को रिमझिम बारिश ने एक बार फिर दस्तक दी है। इससे किसानों को फिलहाल राहत मिली है और बलीराजा की उम्मीदें फिर से पल्लवित हो गई हैं। हालांकि किसान अभी भी जोरदार और लगातार बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

जिले में पिछले करीब दो सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण किसान चिंतित थे। शुरुआत में हुई संतोषजनक बारिश के बाद किसानों ने खरीफ मौसम की बुआई पूरी कर ली थी। लेकिन बाद में बारिश का लंबा अंतराल पड़ने से उग आई कोमल फसलें मुरझाने लगी थीं।

फसलों पर कीटों का प्रकोप बढ़ा

जुलाई महीने में हुई भारी बारिश ने कई क्षेत्रों में कहर बरपाया। फिर एक बार बारिश ने मुंह मोड़ लिया, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई। बारिश के अभाव में सोयाबीन और कपास की फसलों पर, फंगस, सफेद मक्खी जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ गया।

इससे किसानों को अतिरिक्त कीटनाशक छिड़काव करना पड़ा और उत्पादन लागत में भी वृद्धि हुई। ऐसे में 22 अगस्त से शुरू हुई रिमझिम बारिश ने किसानों को कुछ राहत जरूर दी है। बारिश का मौसम शुरू होने के बावजूद कई दिनों तक पानी नहीं बरसने से लोगों के मन में सवाल उठने लगा था कि कहीं मानसून समाप्त तो नहीं हो गया।

पिछले कुछ दिनों से आसमान में बादल तो छा रहे थे, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों में निराशा फैल रही थी। अब रात से रुक-रुक कर हो रही बारिश से शहर सहित आसपास के क्षेत्रों के वातावरण में अच्छी ठंडक महसूस की जा रही है। किसानों की निगाहें अब आने वाले दिनों में होने वाली जोरदार बारिश पर टिकी हैं।

अब भी अच्छी वर्षा होने की इंतेजार

29 और 30 जुलाई को जिले में हुई भारी अतिवृष्टि से जलस्रोतों में पानी की आवक बढ़ी थी। जिले के सात मध्यम परियोजनाओं में से गोकी, वाघाड़ी, सायखेडा, बोरगांव और नवरगांव परियोजनाएं 100 प्रतिशत भर चुकी हैं। वहीं अधरपुस और अडाण बांध भी भरने के करीब पहुंच गए हैं।

हालांकि यवतमाल जिले के बड़े जलाशयों को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है। पुसद, अरुणावती और बेंबला इन तीन बड़े परियोजनाओं में अभी तक कुल 63.59 प्रतिशत जलसंग्रह ही दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में जोरदार बारिश होने पर इन बड़े जलाशयों के जलस्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

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