गेहूं बाजार (सोर्स: AI)
महाराष्ट्र

त्योहारों पर होगा आटा गीला, दो महीने में 250 रुपये बढ़े गेहूं के भाव; क्या है इसका कारण?

Wheat Price Rise In India: सरकारी खरीद का लक्ष्य पार होने के बावजूद गेहूं के भाव ₹3,110 से ₹3,135 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। त्योहारों से पहले आटा, मैदा और सूजी महंगे होने की आशंका है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • निचले स्तरों से गेहूं के भाव में बढ़ोतरी का अंतर ₹500 प्रति क्विंटल तक पहुंचा।

  • रोलर फ्लोर मिलों की खरीद, माल की ढुलाई और निर्यात मांग से बाजार को सहारा मिल रहा है।

  • बाजार में सरकारी गेहूं की आपूर्ति और मंडियों में आवक से आगे कीमतों की दिशा तय हो सकती है।

Wheat Prices Rise Festival Demand Flour And Semolina Rates: गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पार होने के बावजूद बाजार में इसकी कीमतों में तेजी जारी है। मंडियों में आवक घटने, रोलर फ्लोर मिलों की बढ़ती मांग और मैदा-सूजी के चालानी कारोबार के साथ निर्यात मांग बढ़ने से गेहूं के भाव मजबूत हुए हैं।

ऐसे में आगामी त्योहारों के दौरान आटा, मैदा और सूजी की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

3,110 से 3,135 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) एवं महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (मासिया) के उदय सुरेशभाई ठक्कर के अनुसार, इस बार गेहूं की सरकारी खरीद 356 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को पार कर गई है।

इसके बावजूद पिछले सप्ताह मंडियों में गेहूं की आपूर्ति काफी घट गई। इसके चलते भाव में 30 से 35 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई और कीमतें नमी एवं रंग के आधार पर 3,110 से 3,135 रुपये प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गईं।

दो महीने में बाजार में जोरदार तेजी

ठक्कर के मुताबिक, पिछले दो महीनों से चौतरफा मांग निकलने के कारण गेहूं के भाव में करीब 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, निचले स्तरों से तेजी का अंतर 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पिछले एक महीने से किसानों की ओर से मंडियों में माल का दबाव भी नहीं है, जिससे उपलब्धता सीमित बनी हुई है।

दक्षिण भारत की मांग से बाजार को सहारा

रोलर फ्लोर मिलों में आटा, मैदा और सूजी की आपूर्ति संबंधी मांग त्यौहार पर बढ़ने के साथ निर्यात मांग बढ़ने से गेहूं की खरीद तेज हुई है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में भी भाव दोबारा उछले हैं। दक्षिण भारत की ओर गेहूं की खेप भेजे जाने और माल की ढुलाई के लिए रैक उपलब्ध होने से बाजार को समर्थन मिल रहा है।

सरकारी बिक्री पर टिकी बाजार की नजर

ठक्कर का कहना है कि जब तक सरकार बाजार में गेहूं की बिक्री नहीं करती, तब तक भाव में बड़ी गिरावट की उम्मीद के आधार पर मंदी का कारोबार करने से बचना चाहिए। हालांकि, आगे कीमतों की दिशा सरकारी आपूर्ति, मंडियों में आवक और आटा-मैदा-सूजी की मांग पर निर्भर करेगी। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की स्थिति में गेहूं और उससे बनने वाले उत्पादों की कीमतें उपभोक्ताओं के बजट पर असर डाल सकती हैं।

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