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वर्धा शहर से सटे पिपरी मेघे समेत 14 गांवों में प्रादेशिक जलापूर्ति योजना के तहत पानी दिया जाता है।
महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले गांवों में करीब 22 हजार नल उपभोक्ता हैं, जबकि आईएमआईएस प्रणाली में लगभग 40 हजार कनेक्शन दर्ज हैं।
वर्तमान में धाम जलाशय में लगभग 65 प्रतिशत जल भंडारण शेष है।
Jal Jeevan Mission Wardha: वर्धा शहर से सटे पिपरी मेघे सहित आसपास के 13 अन्य गांवों में प्रादेशिक जलापूर्ति योजना संचालित की जा रही है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की देखरेख में चलने वाली इस योजना के अंतर्गत हर घर जल योजना और जल जीवन मिशन के तहत अतिरिक्त नल कनेक्शन भी दिए गए हैं।
इसके परिणामस्वरूप जल की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन के साथ ही अनियमितताओं की स्थिति सामने आ रही है। मजीप्रा के अंतर्गत आने वाले इन 14 गांवों में करीब 22 हजार नल उपभोक्ता हैं, जबकि आईएमआईएस प्रणाली में लगभग 40 हजार नल कनेक्शन दर्ज दिखाई दे रहे हैं। इनमें से कई कनेक्शन दोहराए गए हैं अथवा अपडेट नहीं किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन गांवों में करीब 8 हजार नल कनेक्शन अवैध बताए जा रहे हैं। ऐसे कनेक्शनों के माध्यम से पानी का अवैध दोहन होने की आशंका है। जिले में सूखे की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी वान्मथी सी. ने टिल्लू पंप लगाने वाले उपभोक्ताओं तथा अवैध रूप से पानी का दोहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नए बोरवेल के निर्माण पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
वर्धा सहित आसपास के 14 गांवों में महाकाली स्थित धाम जलाशय से पानी की आपूर्ति की जाती है। फिलहाल धाम जलाशय में लगभग 65 प्रतिशत जल भंडारण शेष है। प्रादेशिक जलापूर्ति योजना में पिपरी (मेघे) सहित कारला, साटोडा, आलोडी, नालवाडी, म्हसाला, वरुड, सिंदी मेघे, उमरी मेघे, सावंगी मेघे, बोरगांव मेघे, वायगांव निपानी और सेलू-काटे गांव शामिल हैं।
भविष्य में जलसंकट की आशंका को देखते हुए जलापूर्ति में और कटौती होने की संभावना है। वर्तमान में इन 14 गांवों में तीन दिन के अंतराल पर नल छोड़े जा रहे हैं। जलाशय में उपलब्ध जल भंडारण की स्थिति को देखते हुए आगामी दिनों में सप्ताह में केवल एक बार जलापूर्ति करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
जिला प्रशासन की बैठक के बाद तहसील स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों के माध्यम से अवैध रूप से पानी का दोहन करने तथा पानी की बर्बादी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी है। इतना ही नहीं, समितियों को अपने कार्यों की रिपोर्ट प्रत्येक पखवाड़े पंचायत समिति के माध्यम से प्रशासन को प्रस्तुत करनी होगी। ऐसे में अब अवैध नल कनेक्शनधारकों के खिलाफ समितियां क्या कार्रवाई करती हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।