

Nashik Electoral Roll Revision: नासिक जिला प्रशासन द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए चलाई जा रही मुहिम इन दिनों तकनीकी और प्रशासनिक पेचीदगियों में फंसी नजर आ रही है। पहचान पत्रों और सूचियों में नामों की वर्तनी में अंतर तथा सर्वर की समस्याओं के कारण बीएलओ और मतदाता, दोनों ही भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
मतदाता पहचान पत्र पर अंकित नाम और मतदाता सूची में दर्ज नाम में भारी अंतर है। वर्तनी की गलतियों के कारण डेटा खोजना मुश्किल हो गया है, जिससे मतदान केंद्रों पर अक्सर हंगामे की स्थिति बन रही है।
सबसे बड़ी शिकायत यह है कि (एपिक नंबर रीडक्टेड) दर्ज करने के बाद भी ऑनलाइन ऐप में मतदाताओं का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है, जिससे प्रक्रिया ठप पड़ गई है। सर्वर की धीमी गति के कारण एक आवेदन पत्र भरने में आधा से एक घंटा तक लग रहा है, जो बीएलओ के कार्यक्षमता पर भारी पड़ रहा है।
पहले पुनरीक्षण का काम 30 जुलाई तक पूरा करना था, जिसे तकनीकी दिक्कतों के कारण चुनाव आयोग ने अब 8 अगस्त तक बढ़ा दिया है। हालांकि, समय सीमा बढ़ने से मतदाताओं में थोड़ी सुस्ती आई है, लेकिन काठे गली और द्वारका जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अभी भी भारी भीड़ देखी जा रही है।
प्रशासन की दोहरी प्रक्रिया के कारण बीएलओ को दिनभर फील्ड पर काम करने के बाद रात 12 बजे तक डेटा एंट्री करनी पड़ रही है। कई बीएलओ की ड्यूटी उनके निवास से काफी दूर लगाई गई है, जिससे ट्रैफिक और सफर में ही उनका बड़ा समय व्यर्थ हो रहा है। बीएलओ का कहना है कि लगातार काम के दबाव और घर लौटने में हो रही देरी के कारण उनके निजी और पारिवारिक जीवन में भी तनाव बढ़ने लगा है।
अपने दस्तावेजों (एपिक नंबर, आधार, आदि) की फोटोकॉपी के साथ ओरिजिनल भी साथ रखें। यदि ऐप में नाम नहीं दिख रहा है, तो बीएलओ को अपना पुराना पहचान पत्र दिखाएं ताकि डेटा सर्च में मदद मिल सके।
सर्वर की गति बढ़ाने और डेटा एंट्री को सरल बनाने के लिए जिला प्रशासन को तत्काल अतिरिक्त तकनीकी सहपयता और मैनपावर की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि बीएलओ पर मानसिक दबाव कम हो सके।