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कम बारिश और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने इन गांवों के लिए विशेष उपाययोजना तैयार की है।
जिलाधिकारी ने जलसंकट से निपटने के लिए तैयार तीन चरणों वाले कृति प्रारूप को मंजूरी दी है।
गर्मी के दौरान 236 गांवों में 240 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जरूरत पड़ने का अनुमान है।
Wardha Water Supply Plan: इस वर्ष अत्यल्प बारिश के कारण भविष्य में भीषण जल किल्लत के आसार व्यक्त किये जा रहे है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने शुरु कर दिये है। भविष्य में पैदा होने वाले जलसंकट पर उपाययोजना के लिए तैयार किये गए कृति प्रारुप को जिलाधिकारी ने मंजूरी दी है। इसमें 1292 गांवों में जलसंकट के आसार व्यक्त किये गए है।
इन गांवों में 2,558 उपाययोजना के कामों पर जोर दिया जाएगा, ऐसा बताया गया।बता दें कि इस वर्ष औसत से भी कम बारिश होने के कारण जलभंडारण की कमी महसूस हो रही है। जिले में जमीनी भू-जलस्तर निचे गया हुआ है। छोटे व बडे जलाशयों के वर्तमान में केवल 65 प्रतिशत ही जलभंडारण शेष है। ऐसे में जनवरी माह से ही जिले में जलसंकट की स्थिति पैदा होने के आसार है।
इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने अभी से जल के अपव्यय के संबंध में कुछ निर्बंध जारी किये है। रबी मौसम की फसलों को जलापूर्ति में कटौती का निर्णय लिया गया है। जलाशयों से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली पेयजलापूर्ति में भी कटौती की आशंका है। इन सभी बातों को देखते हुए तिन चरण में कृति प्रारूप तैयार किया गया। जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने इस प्रस्ताव को जिलाधिकारी की ओर भेजा था। इसे हालही में मंजूरी मिलने की जानकारी है।
अत्यंत कम बारिश के कारण गर्मी के दिनों में भिषण जलसंकट स्थिति पैदा होने के आसार व्यक्त किये जा रहे है। इसे ध्यान में रखते हुए जरुरी उपाययोजना की जा रही है। गत कुछ वर्षों से जिले में कभी टैंकर से पानी की आपूर्ति की नौबत नहीं आयी है। परंतु इस बार के कृति प्रारुप में जिले के 236 गांवों में 240 टैंकर से जलापूर्ति की आशंका बताई गई है।
कृति प्रारूप के अनुसार जिले के 1292 गांवों में लगभग 2558 उपाय योजना के कामों को अंजाम दिया जाएगा। इसमें सार्वजनिक कुओं का गहराईकरण, निजी कुओं का अधिग्रहण, टैंकर व बैलगाड़ी से जलापूर्ति, नल जलापूर्ति योजना की विशेष दुरुस्ती, अस्थायी नल योजना के कार्य, प्रगतिपथ पर होने वाले काम, नई बोरवेल का निर्माण व पुरानी बोरवेल की दुरुस्ती सहित प्राकृतिक जलस्त्रोत मजबूत किये जाएंगे।