Wardha Encroachment Action: वर्धा जिले के आष्टी तहसील के थार गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जिले के सांसद अमर काले और आर्वी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुमित वानखेड़े के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अतिक्रमण कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद अब प्रशासन की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों तक पहुंच गया है।
सांसद अमर काले के अनुसार, थार में एक व्यक्ति का अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन का बड़ा दल पहुंचा था। उन्होंने दावा किया कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से वहां रह रहा है और केवल उसी को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही थी। काले ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने बारिश के मद्देनजर 30 सितंबर तक अतिक्रमण नहीं हटाने संबंधी परिपत्र जारी किया है।
उन्होंने संबंधित थाना प्रभारी और तहसीलदार को पत्र देकर परिपत्र की प्रति भी उपलब्ध कराई थी। काले ने भी ठेकेदारी सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विधायक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अब इस मामले में 30 सितंबर के शासन परिपत्र की वास्तविक लागू शर्तें, संबंधित अतिक्रमण उसके दायरे में आता है या नहीं तथा प्रशासन की कार्रवाई वैध थी या नहीं, यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। प्रशासन के स्पष्टीकरण पर इस पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।
काले ने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी थी कि कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाए। 30 सितंबर के बाद अतिक्रमण हटाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, 'नियम से ऊपर कोई नहीं है। 'हम करें सो कायदा' नहीं चलेगा।' प्रशासन द्वारा कार्रवाई जारी रखने की जानकारी मिलने पर कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के फोन आए, जिसके बाद वे स्वयं थार पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। काले ने दावा किया कि चर्चा के बाद कार्रवाई रोक दी गई।
विधायक सुमित वानखेड़े ने कहा कि थार में की गई कार्रवाई कानूनी थी या नहीं, इसका स्पष्टीकरण प्रशासन ही देगा। हालांकि उन्होंने कनिष्ठ अधिकारियों के साथ कथित रूप से सख्त भाषा के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। उनके अनुसार संबंधित अधिकारी करीब दो माह पहले ही पदस्थ हुए हैं और उन्हें वरिष्ठ प्रशासन से कार्रवाई के निर्देश मिले थे। यदि कार्रवाई पर आपत्ति थी तो वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की जा सकती थी। वानखेड़े ने आरोप लगाया कि आर्वी विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को विभिन्न शिकायतों और जांचों के जरिए बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है।