Wardha ST Bus Fleet Update: वर्धा जिले में आम नागरिकों और यात्रियों के सुरक्षित सफर के लिए राज्य परिवहन की लालपरी बसें सबसे महत्वपूर्ण साधन बनी हुई हैं। वर्तमान समय में जिलेभर के विभिन्न मार्गों पर अलग-अलग श्रेणियों की कुल 272 एसटी बसें दौड़ रही हैं। पिछले डेढ़ साल में प्रशासन द्वारा जिले के पांचों डिपो से लगभग 63 पुरानी बसों को स्क्रैप में भेजा गया है, जबकि इसी समयावधि में वर्धा को 107 नई बसें प्राप्त हुई हैं।
नई बसें मिलने से लंबी दूरी के मार्गों पर फेरियों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे यात्रियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, एक तरफ जहां लंबी दूरी की यात्रा सुगम हुई है, वहीं ग्रामीण इलाकों में चलने वाली बसों की फिटनेस और मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्धा जिले में एसटी महामंडल का परिचालन पांच डिपो वर्धा, हिंगनघाट, आर्वी, पुलगांव और तलेगांव (शाप) के जरिए किया जाता है। इन पांचों डिपो के माध्यम से प्रतिदिन 900 से अधिक बस फेरियों का संचालन होता है।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से लगभग 60 प्रतिशत बसें लंबी दूरी के मार्गों पर चलाई जाती हैं, जबकि शेष 40 प्रतिशत बसें ग्रामीण व अंदरूनी क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
भले ही नई बसों के आने से बेड़े में सुधार दिखा हो, लेकिन ग्रामीण रूटों पर चलने वाली पुरानी बसों के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती जा रही है। कई बार बसें यात्रा के दौरान बीच रास्ते में ही बंद हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
वर्धा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली कई बसों की सीटें फटी हुई हैं, खिड़कियां टूटी हैं और यांत्रिक गड़बड़ियां बनी रहती हैं। समय पर नए टायर न मिलने से दुर्घटनाओं की आशंका भी हमेशा बनी रहती है।
ग्रामीण इलाकों में आज भी एसटी बसें ही आवागमन का मुख्य जरिया हैं। रोजाना काम पर जाने वाले लोग, स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में इन पर निर्भर हैं। रियायती पास सुविधा, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए जारी सरकारी योजनाओं के चलते एसटी बसों में भारी भीड़ रहती है।
यात्रियों ने विभाग से पुरजोर मांग की है कि एसटी बसों की फिटनेस और नियमित मेंटेनेंस पर तत्काल गंभीरता से ध्यान दिया जाए, ताकि यात्रियों का सफर सुगम और सुरक्षित हो सके।