प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
वर्धा

खेती बनी अर्थव्यवस्था की रीढ़, जैविक खेती की ओर बढ़ते किसान, वर्धा में नई उम्मीद

Wardha Agriculture: वर्धा जिले में 2024-25 के दौरान दलहनों की औसत उत्पादकता 1527 किलो प्रति हेक्टेयर दर्ज हुई है। जैविक खेती की मांग बढ़ने से किसान नए विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

अंकिता पटेल

Wardha Organic Farming: वर्धा कृषि जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ग्राम विकास और आत्मनिर्भरता के उद्देश्य से 'गांवों की ओर चलो' का ऐतिहासिक संदेश दिया था। हालांकि, बढ़ते शहरीकरण और कांक्रीट के जंगलों के कारण कृषि क्षेत्र में लगातार कमी आ रही है। इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2024-25 के दौरान जिले में दलहनों की औसत प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1527 किलो दर्ज की गई है, यह जानकारी कृषि विभाग ने दी है।

जिले की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी रोजगार और ग्रामीण विकास के लिए कृषि पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र न केवल सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति भी करता है।

जिले के किसान खरीफ मौसम में मुख्य रूप से कपास, सोयाबीन और तूर की खेती करते हैं, जबकि रवी मौसम में चना और गेहूं की बुवाई प्रमुख रूप से की जाती है। इसके अलावा कुछ किसान मूंग, उड़द एवं अन्य दलहनी फसलों का भी उत्पादन करते हैं।

कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2024-25 में जिले में दलहनों की उत्पादकता 1527 किलो प्रति हेक्टेयर रही है। इस बीच जिले में जैविक कृषि उत्पादों को उपभोक्ताओं द्वारा प्राथमिकता दिए जाने की प्रवृत्ति भी बढ़ती दिखाई दे रही है, जिससे किसानों में जैविक खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है।

वर्ष 2025-26 का लक्ष्य क्या?

खरीफ मौसम में जिले के किसान तूअर, मूंग, उड़द एवं अन्य दलहन फसलों की खेती करते हैं, जबकि रबी मौसम में चना और अन्य दलहनों का उत्पादन लिया जाता है।

कृषि विभाग को वर्ष 2025-26 के लिए खरीफ दलहनों की उत्पादकता का लक्ष्य 1734.20 किलो प्रति हेक्टेयर तथा रबी दलहनों की उत्पादकता का लक्ष्य 1449.22 किलो प्रति हेक्टेयर प्राप्त हुआ है। मौसम के अंत में फसल कटाई प्रयोग और अन्य आंकड़ों के संकलन के बाद वास्तविक उत्पादकता स्पष्ट हो सकेगी।

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