Maharashtra Police Station Cleanliness: वर्धा इन दिनों जिले के थानों व पुलिस चौकियों में खड़े जब्ती के वाहन कबाड़ हो रहे हैं, जो थाना परिसरों की स्वच्छता पर दाग बने हैं। कुछ थानों का परिसर कबाड़खाने में तब्दील हो गया है। थानों में कई महीनों से जब्ती के वाहन खड़े हैं, जो रखे-रखे ही खराब हो रहे। समय रहते इनकी नीलामी होती तो शासन को लाखों रुपयो का राजस्व मिलता। अब तो स्थिति यह है कि, गर नीलामी हुई तो कबाड़ के भाव ही तौलकर यह वाहन बिकेंगे। अधिक समय तक वाहन खड़े रहने के कारण इसके कलपूर्जे भी गायब होते जा रहे हैं।
पुलिस द्वारा शराब की अवैध ढुलाई, रेत तस्करी, गांजा तस्करी सहित दुर्घटनाग्रस्त वाहन व विभिन्न अपराधिक गतविधियों में उपयोग में लायेजाने वाले वाहन जब्त किये जाते हैं। वाहनों को संबंधित थाना परिसर में खड़ा कर दिया जाता है। कुछ लोग न्यायालय के आदेश बिना अपना वाहन वापस नहीं ले जा पाते। परिणामवश खड़े-खड़े वाहन जंग की भेंट चढ़ रहे हैं।
वर्धा जिले के 19 थाना परिसर में कम अधिक मात्रा में जब्ती के वाहन खड़े है। इन वाहनों की निश्चित समय सीमा के बाद नीलाम का प्रावधान है। लेकिन नीलामी की प्रक्रिया में देरी होने से परिसर कबाड़खाने में तब्दील हो रहा है। कुछ लोग न्यायालय के आदेश से अपना वाहन वापस ले जाते हैं। परंतु बेनामी और लावारिस वाहन जंग खाते रहते हैं। दर्जनों गाड़यां ऐसी हैं जो कई वर्षों से पड़ी हुई हैं। वाहनों के इर्द-गिर्द पेड़-पौधें उग आए हैं।
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वाहन मालिक अगर कोर्ट से रिलीज आर्डर (सुपुर्दनामा) लेकर आता हैं, तो दस्तावेज की जांच के बाद वाहन उसके हवाले कर दिया जाता है। शराब मामले में जब्त कई वाहन हाईकोर्ट के आदेश पर छोड़ा जाता है। जिनके पास कागजात नहीं होते हैं, वे गाड़ी वापसी ले जाने की कोशिश भी नहीं करते हैं। नियमानुसार लावारिस अवस्था में बरामद या जब्त वाहन की छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जाती है। वाहन बरामद होने पर वर्धा पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत रिकॉर्ड में लेती है। बाद में न्यायालय में इसकी जानकारी दी जाती है।