प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
वर्धा

वर्धा में कपास के दाम गिरे, तुअर बना किसानों की उम्मीद; खरीफ फसलों के भाव में उतार-चढ़ाव

Wardha tur price hike: वर्धा जिले में कृषि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। कपास के दाम गिरे हैं, जबकि तुअर को 9,175 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिलने से किसानों को राहत मिली है।

अंकिता पटेल

Wardha Farmers Produce Prices: वर्धा पिछले एक सप्ताह से कृषि उपज के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर कपास के दामों में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं तुअर को अच्छे भाव मिलने से किसानों को राहत मिली है। हिंगणघाट कृषि उपज मंडी समिति में शुक्रवार, 30 जनवरी को तुअर को अधिकतम 9,175 रुपये प्रति क्विंटल का भाव प्राप्त हुआ।

गत सप्ताह तक कपास के भाव में तेजी देखी जा रही थी और अच्छे कपास को 8,500 रुपये प्रति क्विंटल तक का दाम मिला था। हालांकि, वर्तमान में कपास के दामों में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। फिलहाल बाजार में अच्छे दर्जे के कपास को लगभग 8,000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है।

अधिकांश किसानों ने पहले ही कम दामों में कपास की बिक्री कर दी थी, जिससे अब गिने-चुने किसानों के पास ही कपास शेष है। खरीफ मौसम में सोयाबीन और कपास की फसलों पर रोगों का प्रकोप होने से उत्पादन में भारी कमी आई है।

सोयाबीन में रोग फैलने के कारण कई किसानों ने फसल की कटाई न करते हुए रोटावेटर चला दिया। वहीं कपास को फसल पर गुलाबी सुंडी (बोड इल्ली) के हमले से प्रति एकड़ मात्र 3 से 4 क्विंटल उत्पादन हुआ, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।

वर्तमान में खरीफ मौसम की तुअर की फसल पक चुकी है और किसान कटाई कर बाजार में बिक्री के लिए ला रहे हैं। इस वर्ष तुअर की फसल की स्थिति अच्छी होने से उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। बाजार में तुअर की आवक कम होने के कारण इसके दामों में तेजी देखने को मिल रही है।

चना को 5,701 रुपये प्रति क्विंटल का भाव

खरीफ मौसम में हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों ने रबी मौसम में गेहूं और चना की बुआई की है। इस समय चना की फसल पकने की अवस्था में है, जबकि गेहूं की फसल अच्छी तरह बढ़वार पर है।

बाजार में अच्छे गुणवत्ता वाले चने को 5,701 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, हालांकि चना की फसल पर मुरझा रोग (मर रोग) का प्रकोप बढ़ने से किसानों को उत्पादन घटने की आशंका सता रही है। कुल मिलाकर, कृषि उपज के दामों में आई तेजी से किसान आगे भाव और बढ़ने की तम्मीद कर रहे हैं।

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