Highlights:
वर्धा जिले में संभावित चारा संकट से निपटने के लिए दो योजनाओं के तहत अब तक कुल 43,105 किलो चारा बीज बांटे गए हैं।
जिला नियोजन समिति (DPC) की निधि से 6,169 पशुपालकों को 36,373 किलो चारा बीज वितरित किए गए हैं।
VMDDP योजना के तहत पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर चारा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 6,732 किलो मक्का और ज्वार के बीज बांटे गए हैं।
Wardha Fodder Shortage: वर्धा जिले में इस वर्ष मानसून के दौरान कम बारिश होने से बड़े और मध्यम जलाशय पूरी क्षमता से नहीं भर पाए हैं। इसके चलते आगामी दिनों में जिलेवासियों को जलसंकट के साथ ही पशुओं के लिए चारे की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस संभावित संकट को देखते हुए पशुसंवर्धन विभाग ने अभी से चारा उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
विभाग द्वारा सिंचाई की सुविधा रखने वाले पशुपालकों को चारा फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही उन्हें चारा बीज भी वितरित किए जा रहे हैं। 'मांगने वाले को चारा बीज' की नीति के तहत दो योजनाओं से अब तक कुल 43,105 किलो चारा बीज वितरित किया जा चुका है।
भविष्य में पशुओं के लिए चारे की कमी न हो, इसके लिए पशुसंवर्धन विभाग ने जिला नियोजन समिति (डीपीसी) की निधि से अब तक 6,169 लाभार्थियों को 36,373 किलो चारा बीज वितरित किया है। इसमें वर्धा तहसील के 1,100, सेलू के 876, देवली के 1,100, आर्वी के 743, आष्टी के 500, कारंजा के 700, समुद्रपुर के 750 तथा हिंगनघाट तहसील के 400 लाभार्थी शामिल हैं। विभाग का प्रयास है कि पशुपालक अपने खेतों में चारा उगाकर आगामी दिनों में होने वाली संभावित कमी से निपट सकें।
चारा फसलों में ज्वार की खेती पशुपालकों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। इससे पशुओं को हरा चारा उपलब्ध होगा और बाजार से चारा खरीदने की निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, पशुसंवर्धन विभाग के विशेषज्ञों ने ज्वार खिलाने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। ज्वार के अंकुरण के बाद कम से कम 50 दिन तक इसे पशुओं को खिलाने से बचना चाहिए। इससे पहले हरी ज्वार खिलाने पर पशुओं को विषाक्तता होने का खतरा रहता है।
सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए चारे की जरूरत गांव में ही पूरी करने के उद्देश्य से वीएमडीडीपी योजना के तहत अब तक मक्का और ज्वार के कुल 6,732 किलो बीज वितरित किए गए है। विभाग द्वारा सिंचाई की सुविधा वाले पशुपालकों को चारा उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि आगामी समय में चारे की कमी का असर पशुपालन पर कम से कम पड़े।