Dahegaon Deoli Road Construction: दहेगांव-देवली-वायगांव-कोसुर्ला मार्ग का निर्माण कार्य लंबे समय से अधर में होने से आक्रोशित नौ गांवों के नागरिकों ने सोमवार को जामणी स्थित भदाड़ी नदी के पुल पर रास्ता रोको आंदोलन किया। आंदोलन के कारण कुछ समय के लिए मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। आंदोलन स्थल पर विधायक राजेश बकाने, तहसीलदार समर्थ क्षीरसागर तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंता मुद्दलवार और महेश मोकलकर पहुंचे और नागरिकों की समस्याएं सुनीं।
विधायक राजेश बकाने ने रखड़े निर्माण कार्य को लेकर पालकमंत्री, जिलाधिकारी वर्धा तथा वरिष्ठ अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को सड़क का काम तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। वहीं, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने आंदोलनकारियों की मांगों को मानते हुए अगले सात दिनों में सड़क का निर्माण शुरू करने तथा यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का लिखित आश्वासन दिया। सड़क निर्माण के दौरान किसानों को हुए नुकसान का सर्वे कर सात दिनों में तहसील कार्यालय में रिपोर्ट जमा करने की बात भी अधिकारियों ने कही।
दहेगांव-देवली-वायगांव-कोसुर्ला मार्ग के सीमेंट सड़क निर्माण को वर्ष 2024 में 237 करोड़ 79 लाख रुपए की मंजूरी मिली थी। निर्माण कार्य 7 अक्टूबर 2024 को शुरू किया गया, लेकिन दो वर्ष का समय बीतने के बावजूद सड़क का काम पूर्ण नहीं हुआ है। बताया गया कि निर्माण का ठेका हैदराबाद की आर.एम.एन.इन. कंपनी को दिया गया है। अब तक कंपनी द्वारा 71 करोड़ 72 लाख रुपए की राशि उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। जामणी में भदाड़ी नदी पर पुल का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। बारिश के दौरान मार्ग पर यातायात बंद हो गया था।
सड़क खोदकर मिट्टी डालने के बाद काम बंद होने से आवागमन में परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण की धीमी गति और सड़क की खराब स्थिति के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। आंदोलन में भाविक आखूड, गौरव गावंडे, नंदकिशोर बिजवार, दिलीप परचाके, लता पुनसे, निशिगंधा पुनसे, मंदा गौरदिपे, स्वप्नील बैस, उत्तम कोलनाके, फुलचंद बोरकर, दत्ता महाजन, प्रकाश भोयर, बजरंग दल व विश्व हिंदू परीषद के मोहन जोशी, दिनेश क्षीरसागर, गोल्डी बग्गा, भाजपा के गौरव गावडे, गजानन दुतारे, नितीन चांदेकर, जयंत लुगे सहित ग्रामीण शामिल हुए थे।
सड़क निर्माण पूरा करने की निर्धारित समयसीमा 7 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में ठेकेदार को नई समयसीमा कितने महीनों के लिए दी गई है, इस पर अधिकारियों ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए जल्द से जल्द काम पूरा करने की मांग की है। आंदोलन के कारण बसें और अन्य वाहन आंदोलन स्थल से वापस लौटे, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।