वर्धा कृषि भूमि (सोर्स - सोशल मीडिया) 
वर्धा

वर्धा में दादासाहब गायकवाड योजना की सफलता: 4 वर्षों में 183 भूमिहीन बने मालिक, 100% अनुदान पर मिली कृषि भूमि

Wardha News: वर्धा जिले में पिछले 4 वर्षों में 183 भूमिहीन परिवारों को दादासाहब गायकवाड योजना के तहत खेती की जमीन दी गई है। वर्ष 2024-25 में 33 पात्र लाभार्थियों को 70 एकड़ भूमि आवंटित की गई।

रूपम सिंह

Dadasaheb Gaikwad Yojana Wardha News: वर्धा अनुसूचित जाति और नवबौद्ध वर्ग के भूमिहीन परिवारों के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित पद्मश्री कर्मवीर दादासाहब गायकवाड सबलीकरण व स्वाभिमान योजना ने जिले में पिछले चार वर्षों में 183 लाभार्थियों को कृषि उपजिविका के लिए जमीन प्रदान की है। इस योजना ने न केवल स्वाभिमान बढ़ाने में मदद की है, बल्कि समाज के पिछड़े वर्ग के जीवन स्तर को सुधारने में भी अहम भूमिका निभाई है।

यह योजना वर्ष 2004-05 से राज्य में लागू है। इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले अनुसूचित जाति एवं नवबौद्ध वर्ग के भूमिहीन, विधवा और परित्यक्ता लाभार्थियों को प्रति लाभार्थी 4 एकड़ कोरड़वाहू और 2 एकड़ ओलीताखालील जमीन 100 प्रतिशत अनुदान पर दी जाती है। योजना की शर्तों के अनुसार लाभार्थियों को प्राप्त भूमि को न तो ठेके पर दिया जा सकता है और न ही बेचा जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों को खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है।

गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले भूमिहीन अनुसूचित जाति और नवबौद्ध वर्ग के लोग ही इस योजना के लाभार्थी बन सकते हैं। भूमि आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित है। वर्ष 2024-25 में प्राप्त 61 आवेदनों में से 33 पात्र लाभार्थियों को ईश्वर चिठ्ठी के माध्यम से चयनित किया गया और उन्हें कुल 70 एकड़ भूमि वितरित की गई।

आवश्यक दस्तावेज

लाभार्थी आवेदन के साथ सक्षम अधिकारी का जाति प्रमाण पत्र, सक्षम अधिकारी का आय प्रमाण पत्र, भूमिहीनता का तलाठी प्रमाण पत्र, विधवा/परित्यक्ता होने का प्रमाण पत्र, दारिद्र रेखा प्रमाण पत्र या अंत्योदय शिक्षा पत्रिका की कॉपी, अनुसूचित जाति/जमाती अत्याचार पीड़ित होने का प्रमाण आदि दस्तावेज प्रस्तुत करें।

आगामी वर्ष के लिए आवेदन

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 150 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वर्धा जिलास्तरीय समिति द्वारा भूमि खरीद प्रक्रिया और ईश्वर चिट्ठी आदि प्रक्रियाओं के बाद पात्र लाभार्थियों को योजना का प्रत्यक्ष लाभ दिया जाएगा। इस योजना ने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी प्रयासों से समाज के पिछड़े वर्गों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

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