Wardha Development Projects: वर्धा जिले की राजनीति में इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा उन पर होने वाली बयानबाजी सुर्खियां बंटोर रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के सांसद अमर काले एक के बाद एक मुद्दे उठाकर पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर और भाजपा विधायक सुमीत वानखेड़े को घेर रहे हैं।
जवाब में भाजपा भी पीछे हटने के बजाय उसी आक्रामक अंदाज में पलटवार कर रही है। नतीजा यह है कि जिले में अब 'भोयर-वानखेड़े बनाम काले' की सीधी राजनीतिक टक्कर दिखाई देने लगी है।
सांसद काले ने प्राचीन कारागृह को नहीं तोड़ने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसकी जमीन बिल्डरों को देने की तैयारी है। आरोप गंभीर है, लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मौजूदा कारागृह आज की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। करीब छह माह पहले नए कारागृह के लिए सरकार की मंजूरी और जमीन हस्तांतरण की कार्रवाई भी हो चुकी है।
भाजपा इसे सीधे तौर पर 'विकास विरोध की राजनीति' के रूप में पेश कर रही है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार के माध्यम से शुरू होने वाले कामों में सांसद काले लगातार सवाल उठाते हैं। जांच की मांग करते है और इससे कामों की गति प्रभावित होती है। दूसरी ओर काले की राजनीति का आधार यही सवाल है सरकारी निधि का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से हो, यही उनकी मांग है।
वर्षा की राजनीति में आने वाले समय में सबसे बड़ी लड़ाई विकास कार्यों के श्रेय को लेकर भी हो सकती है। सरकार यदि कोई बड़ा प्रकल्प मंजूर करती है तो उसका राजनीतिक लाभ सत्ता पक्ष लेना चाहेगा। विपक्ष स्वाभाविक रूप से उसमें कमियां खोज कर अपनी भूमिका दर्ज कराएगा। ऐसे में सवालों और आरोपों की राजनीति तेज होना तय है।
लेकिन जनता को आरोपों की राजनीति से ज्यादा काम का परिणाम चाहिए। यदि सांसद के आरोप सही हैं तो सरकार को दस्तावेजों के साथ जवाब देना चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो भाजपा को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों से उन्हें खारिज करना चाहिए। फिलहाल तस्वीर साफ है काले पीछे हटने के मूड में नहीं है और भोयर वानखेडे भी जवाबी हमला छोड़ने वाले नहीं है।
आष्टी के थार गांव में अतिक्रमण हटाने के मुद्दे ने इस राजनीतिक संघर्ष को और धार दे दी सांसद काले ने विधायक सुमीत वानखेडे पर तीखी टिप्पणी करते हुए अधिकारियों को भी आड़े हाथ लिया। जवाब में वानखेडे ने भी सांसद को उसी तेवर में ललकारा।
(इनपुटः गजानन गावंडे)