Wardha MSME Government Schemes: वर्धा जिले में लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर बढ़ाना, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और छोटे उद्यमों को आसानी से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रमुख उद्देश्य है।
लघु उद्योग दिवस के अवसर पर जिले में एमएसएमई क्षेत्र को उपलब्ध कराए गए ऋण के पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो योजनाओं के माध्यम से उद्योगों को मिलने वाली राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, ऋण प्राप्त करने वाले खातों की संख्या में बड़ी गिरावट यह सवाल भी खड़ा करती है कि योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर तक पहुंच रहा है या नहीं।
| वित्तीय वर्ष | बकाया खाते | बकाया राशि (करोड़ रुपये) |
|---|---|---|
| 2025-26 | 43806 | 2226.98 |
| 2024-25 | 24418 | 1849.75 |
| 2023-24 | 26031 | 1591.15 |
| 2022-23 | 131968 | 1432.11 |
| 2021-22 | 148792 | 1292.32 |
वर्धा जिले में लघु उद्योग 2021-22 में एमएसएमई क्षेत्र के 76 हजार 704 खातों में 785.82 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया था। वर्ष 2025-26 में खातों की संख्या घटकर 22 हजार 337 रह गई, लेकिन ऋण वितरण की राशि बढ़कर 2,091.94 करोड़ रुपये पहुंच गई।
यानी पांच वर्षों में ऋण वितरण की राशि में करीब 166 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि जिन उद्यमियों को वित्तीय सहायता मिल रही है, उन्हें पहले की तुलना में बड़े स्तर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल बड़े ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि छोटे उद्यमियों, नवउद्यमियों और रोजगार सृजन करने वाले व्यवसायों तक संस्थागत वित्त पहुंचाना भी है।
ऐसे में खातों की संख्या में हुई कमी चिंता का विषय है। 2021-22 की तुलना में 2025-26 में ऋण वितरण वाले खातों में करीब 71 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। इससे योजनाओं की पहुंच बढ़ाने, छोटे उद्यमियों को ऋण प्रक्रिया की जानकारी देने और बैंकिंग व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता सामने आती है।
| वित्तीय वर्ष | ऋण वितरण खाते | वितरित राशि |
|---|---|---|
| 2025-26 | 22,337 | 2,091.94 करोड़ रु. |
| 2024-25 | 10,916 | 1,711.80 करोड़ रु. |
| 2023-24 | 12,747 | 1,450.64 करोड़ रु. |
| 2022-23 | 78,719 | 1,311.32 करोड़ रु. |
| 2021-22 | 76,704 | 785.82 करोड़ रु. |
वर्धा जिले में एमएसएमई क्षेत्र का कुल बकाया ऋण भी लगातार बढ़ा है। 2021-22 में 1,292.32 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में यह 2,226.98 करोड़ रुपये हो गया। यानी पांच वर्षों में बकाया राशि में करीब 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
हालांकि, बकाया खाती की संख्या 1 लाख 48 हजार 792 से घटकर 43 हजार 806 रह गई है। कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि सरकारी वित्तीय सहायता की राशि बढ़ाने का उद्देश्य काफी हद तक सफल रहा है।
लेकिन अधिक से अधिक छोटे उद्यमियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की चुनौती अभी बनी हुई है। ऋण की राशि के साथ लाभार्थियों की संख्या बढ़ाना ही लघु उद्योगों के वास्तविक विस्तार और रोजगार सुजन के लिए अधिक महत्वपूर्ण होगा।