प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )  
वर्धा

फरवरी में ही बढ़ी गर्मी, वर्धा में एक्शन प्लान तेज, बोरवेल, कुएं, जलापूर्ति मरम्मत पर फोकस

Wardha Water Crisis: वर्धा में फरवरी से ही गर्मी बढ़ने पर प्रशासन ने ग्रामीण जलसंकट से निपटने के लिए कृति प्रारूप तैयार करना शुरू किया है। अगले सप्ताह इसे मंजूरी मिलने की संभावना है।

अंकिता पटेल

Wardha Water Supply Plan: वर्धा जिले में फरवरी माह के शुरूआती दिनों में ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। आगामी दिनों में तपन और बढ़ने की आशंका है। ऐसी स्थिति में पेयजल आपूर्ति का नियोजन करने में प्रशासन जुट गया है। गर्मी के दिनों में ग्रामीण क्षेत्र में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए कृति प्रारूप तैयार हो रहा है।

हिंगनघाट क्षेत्र की जायजा बैठक की रिपोर्ट का इंतजार है। सभी तहसीलों से आने वाले प्रारुपों की स्क्रूटनी के बाद पक्का कृति प्रारुप मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। आगामी सप्ताह में प्रारूप को मंजूरी मिलने की संभावना है।

वर्ष 2024-25 में जिले के 500 से अधिक गांवों में जलसंकट से निपटने के उपायोजना के 918 कामों का प्रस्ताव रखा गया था। इनमें से 560 कामों को मंजूरी मिली थी, जबकि 468 काम पूर्ण होने की जानकारी है, इसमें नई बोरवेल का निर्माण, बोरवेल की दुरुस्ती, निजी कुओ का अधिग्रहन, सार्वजनिक कुओं का गहराईकरण व जलापूर्ति योजना की विशेष दुरुस्ती के कामों का समावेश है।

प्रतिवर्ष तीन चरण में प्रारूप को मंजूरी मिलती है। दूसरे व तीसरे चरण के कामों को अधिक महत्व रहता है। उस समय तपन अपने चरम पर होती है। जमिनी जलस्तर निचे की ओर जाता है।

जलाशयों का जलभंडार भी कम हो जाता है। मई व जून के शुरूआती दिनों में जिले के छोटे जलाशय लगभग सुख जाते है। कुछ मध्यम व बड़े जलाशयों के भरोसे जलापूर्ति होती है। वर्तमान में जिले के बड़े, मध्यम व छोटे कुल 9 जलाशयों में 62 प्रतिशत जल भंडारण शेष है।

अप्रैल के अंत तक तपन बढ़ने से इसमें भारी मात्रा में कमी आने की संभावना है। इन जलाशयों से पेय जलापूर्ति के साथ साथ रबी मौसम की फसलों के लिए कितना पानी देना है, इसका उचित नियोजन प्रशासन को करना है।

फिलहाल सभी तहसीलों से जिप के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसकी स्कूटनी भी चल रही है। शीघ्र ही जलसंकट से निपटने कृति प्रारूप मंजूरी के लिए जिलाधिकारी को भेजा जाएगा।

धाम परियोजना में 67 प्रतिशत जलभंडार उपलब्ध

वर्षा शहर व आसपास के 14 गांवों को महाकाली स्थित धाम प्रकल्प से जलापूर्ति होती है। वर्तमान में धाम प्रकल्प में 67 प्रतिशत जलभंडार शेष है। वर्धा शहर में फिलहाल 2 दिन बाद जलापूर्ति हो रही है।

वहीं पिपरी प्लस 14 गांवों में भी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना के माध्यम से 2 दिन बाद जलापूर्ति सेवा शुरू है, गर्मी के दिनों में जलापूर्ति में कटौती होने की संभावना है। जलसंकट स्थिति पैदा न हो इस दृष्टि से नियोजन शुरू है।

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