हाईवे पुलिस के 37 प्रश पद रिक्त (सौजन्य-सौजन्य मीडिया) 
वर्धा

हाईवे पर सुरक्षा भगवान भरोसे! पुलिस में 37% पद खाली, सड़क सुरक्षा पर संकट गहराया

एक और वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नए एक्सप्रेस वे महामार्ग यानी हाईवे का निर्माण तेजी से किया जा रहा। परंतु उस तुलना में मार्ग की सुरक्षा व दुर्घटना को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं हो रहा।

प्रिया जैस

Highway Accident Control Maharashtra: महामार्ग से गुजरने वाली वाहनों की जांच एवं नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। किंतु महामार्ग पुलिस के 37 प्रतिशत पद रिक्त होने के कारण मार्ग की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह निर्माण हुआ है। राज्य के विभिन्न क्षेत्र राष्ट्रीय, राजमार्ग के साथ एक्सप्रेस वे गुजरे हैं।

वर्धा जिले से दिल्ली-हैदराबाद, कोलकाता-मुंबई दो प्रमुख राष्ट्रीय महामार्ग के साथ एनएच 361 बुट्टीबोरी-तुलजापुर, समृद्धि महामार्ग व अन्य कुछ राष्ट्रीय महामार्ग गुजरे हैं। इन मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी महामार्ग पुलिस की है। जिस जिले से यह मार्ग गुजरे है। उस जिले की पुलिस अधीक्षक कार्यालय की आस्थापना से पुलिसकर्मियों की महामार्ग पुलिस में नियुक्ति की जाती है। राज्य में महामार्ग पुलिस के 3,017 पद मंजूर है।

महामार्ग की सुरक्षा के लिये तैनात कर्मी

मात्र वर्तमान स्थिति में 1,849 अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे स्पष्ट होता है की, महामार्ग पुलिस के करीब 37 प्रतिशत पद रिक्त है। फिलहाल महामार्ग पुलिस के 1168 पद रिक्त है। यह पद रिक्त होने के कारण महामार्ग की सुरक्षा के लिये तैनात कर्मियों की संख्या पूरी नहीं होने के कारण हादसा होने पर पुलिस समय पर नहीं पहुंच पाती तथा नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाने वाले चालकों पर अंकुश लगाने में भी पुलिस समर्थ नहीं होती। यह पद अनेक वर्ष से रिक्त पडे है। परंतु पद भरने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

वित्त विभाग का आदेश बना रोड़ा

राज्य में बीते आठ वर्ष में अनेक नए महामार्ग का निर्माण हुआ है। उसी दृष्टि से नये पद निर्माण होना आवश्यक है। परंतु 20 प्रश से अधिक पद रिक्त होने के कारण नवीन पदों का निर्माण नहीं किया जा सकता है। जिसका कारण वित्त विभाग का 8 जुलाई 2014 के पत्र प्रमुख कारण बताया गया है।

जिला पुलिस विभाग पर बढ़ रहा बोझ

महामार्ग पुलिस के लिए जिला स्तर से अधिकारी व कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति करना है। एक और जिला पुलिस में पहले ही पुलिसकर्मियों की कमी है। ऐसे में महामार्ग की सुरक्षा के लिए भी उन्हें मनुष्यबल की पूर्ति करनी है। परिणामवश जिला पुलिस विभाग आवश्यकता के अनुसार पुलिस कर्मियों की पूर्ति नहीं कर पाता है। उल्लेखनीय है कि, समृद्धि महामार्ग की जिम्मेदारी जाम महामार्ग पुलिस को सौंपी गई है। एक ही जगह कर्मी दो जगह कैसे सेवा देंगे, यह भी प्रश्न निर्माण हुआ है।

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