डॉ. पंकज भोयर , धर्मांतरण के खिलाफ कानून  
वर्धा

महाराष्ट्र में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून मंजूर, उल्लंघन पर 10 साल तक सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान

Wardha illegal conversion: महाराष्ट्र सरकार ने 'धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026' को मंजूरी दी जबरन या धोखे से धर्मांतरण पर 10 वर्ष तक की सजा होगी, विवाह हेतु किए गए अवैध धर्मांतरण अब अमान्य माने जाएंगे।

रूपम सिंह

Minister Dr. Pankaj Bhoyar: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बढ़ती कथित अवैध धर्मांतरण की घटनाओं को देखते हुए 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026' को मंजूरी दे दी है।

यह कानून जबरन, प्रलोभन देकर या धोखाधड़ी के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद इस विधेयक को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

प्रस्ताव को राज्य के गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने सभागृह में रखा था। सरकार के अनुसार, संविधान द्वारा प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है और इसमें किसी व्यक्ति को जबरन धर्म बदलने का अधिकार शामिल नहीं है। हाल के वर्षों में राज्य में कमजोर वर्गों पर दबाव, लालच या विवाह के माध्यम से धर्मांतरण के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिससे सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ रहा है।

जबरन धर्मांतरण के लिए बना कानून

डॉ. भोयर महाराष्ट्र प्रस्तावित धर्म स्वतंत्रता कानून और विधेयक का पूरे राज्य को इंतजार था, उसे बनाने का साहस मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में दूरदर्शिता वाली सरकार ने दिखाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून विशेष रूप से जबरन धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।

तो रद्द होगी संबंधित संस्थाओं की मान्यता

इसके अलावा, ऐसे मामलों में शामिल संस्थाओं की मान्यता रद्द की जा सकती है। सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे तथा उनकी सुनवाई सत्र न्यायालय में की जाएगी। कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि अवैध धर्मातरण से प्रभावित व्यक्ति को भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा और पुनर्वास सहायता का अधिकार मिलेगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून सामाजिक संतुलन बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए लाया गया है। सरकार किसी भी नागरिक के अधिकार छीनने का काम नहीं कर रही है।

कानून की प्रमुख विशेषताएं

  • इस अधिनियम के तहत जबरन, धोखे से या प्रलोभन देकर धर्मांतरण करना, करवाना या उसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध होगा, ऐसे धर्मांतरण को शून्य और अमान्य माना जाएगा।
  • यदि धर्मांतरण के उद्देश्य से विवाह किया गया है, तो उसे भी न्यायालय द्वारा निरस्त किया जा सकेगा।
  • पीड़ित महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित है, तो सजा और जुर्माना बढ़ाकर 7 वर्ष और 5 लाख रुपये तक किया गया है, धर्मातरण करने या उसका आयोजन करने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था को 60 दिन पूर्व सक्षम प्राधिकारी को सूचना देना अनिवार्य होगा।
  • धर्मातरण के बाद 21 दिनों के भीतर घोषणा पत्र जमा करना भी आवश्यक होगा, अन्यथा प्रक्रिया अमान्य मानी जाएगी।
  • कानून के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 7 वर्ष की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि सामूहिक धर्मांतरण और पुनरावृत्ति के मामलों में सजा 10 वर्ष तक हो सकती है।

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