वर्धा के जाम चौराहे पर प्रभाताई राव विचार मंच ने रास्ता रोको आंदोलन किया।
आंदोलन में सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 37 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
सूखाग्रस्त किसानों को एक लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की गई।
Prabhatai Rao Vichar Manch: वर्धा जिले में इस वर्ष अपर्याप्त बारिश और गठबंधन सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण किसान प्राकृतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने, फसलों को उचित दाम दिलाने और कर्ज की जबरन बसूली बंद करने की मांग को लेकर प्रभाताई राव विचार मंच ने जाम चौराहे पर रास्ता रोको आंदोलन किया।
मंच की नेता चारु टोकस के निर्देश पर जिलाध्यक्ष प्रवीण उपासे के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया। आंदोलन के दौरान चौराहे की चारों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 37 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद करीब एक घंटे में यातायात बहाल किया गया।
आंदोलनकारियों ने सूखाग्रस्त किसानों को तत्काल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने, कपास की 15 हजार और सोयाबीन को 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल भाव देने की मांग की। इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी की राशि तत्काल बैंकों में जमा करने, अगले कृषि सीजन के लिए कर्ज उपलब्ध कराने और फसल बीमा योजना लागू करने की मांग उठाई गई।
इसके अलावा किसानों के खेतों में सौर ऊर्जा योजना रद्द कर पहले की तरह बिजली उपलब्ध कराने, निजी साहूकारों और फाइनेंस कंपनियों की जबरन कर्ज वसूली पर रोक लगाने, रासायनिक खाद की कीमतें कम करने तथा खाद के लिए ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया बंद करने की मांग भी की गई।
आंदोलन को डॉ. रामकृष्ण खुजे, गुणवंत कोठेकर, रामा वाघ, प्रशांत गहुकार और विजय तडस ने भी किसानों को संबोधित किया।
आंदोलन में मनीष साहू, निखिल श्रीवास, प्रवीण पनत, गजानन ओरेकर, सुरेश अराडे, अमित मांडवकर, महेश नागापुरे, पुरुषोत्तम भगत, प्रशांत बढूले, वामन बावणे, प्रशांत फोफारे, दिलीप डंभारे सहित अनेकों ने हिस्सा लिया था।
मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीण उपासे ने कहा कि कम बारिश, महंगे खाद-बीज और फसलों की कम अंकुरण क्षमता के कारण इस वर्ष कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है। पानी की कमी के चलते रबी सीजन की खेती पर भी संकट मंडरा रहा है। उन्होंने खेतों में कुएं और बोरवेल खोदने पर लगी पाबंदी हटाकर किसानों को इसकी अनुमति देने की मांग की।