

नागपुर जिले के अदासा कोल यार्ड में आग की घटनाओं को लेकर सवाल उठे हैं।
पिछले तीन महीनों में कोल यार्ड-1 में आग लगने का दावा किया गया है।
कोल यार्ड-2 में पुराने आग प्रभावित कोयले को नए स्टॉक में मिलाने का आरोप है।
करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन कोयले के स्टॉक और एक लाख टन प्रभावित होने का अनुमान जताया गया है।
Nagpur Coal Yard Fire News: नागपुर जिले में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सावनेर सब-एरिया अंतर्गत अदासा यूजी टू ओसी कोल यार्ड में आग की घटनाओं ने स्टॉक प्रबंधन और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप हैं कि पिछले तीन महीनों में कोल यार्ड-1 में आग लगने की घटनाएं हुई, वहीं कोल यार्ड-2 में पुराने आग प्रभावित कोयले को नए स्टॉक में मिलाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। करीब 2।5 लाख मीट्रिक टन कोयले के स्टॉक और लगभग 1 लाख मीट्रिक टन कोयले के प्रभावित होने का अनुमान जताया जा रहा है।
हालांकि, इन आंकड़ों और पुराने कोयले के कथित मिश्रण की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। जांच में आग के कारण, वास्तविक नुकसान, स्टॉक रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए।
नागपुर जिले में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सावनेर सब-एरिया अंतर्गत कोल गार्ड-1 में आग की घटनाएं कब-कब हुई, नुकसान कितना हुआ और उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था में क्या सुधार किए गए, इसकी जांच होनी चाहिए, कोल यार्ड-2 में पुराने और नए कोयले की मात्रा, गुणवत्ता रिपोर्ट, वजन पर्चियों तथा स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया जाए, यह भी स्पष्ट हो कि आग प्रभावित कोयले को अलग रखने और उसकी गुणवत्ता जांचने के निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
अदासा प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष तकनीकी जांच होनी वाहिए, यदि सुरक्षा में लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सरकारी संपत्ति को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन भी कराया जाए।
कोयले की गुणवत्ता, ग्रेड और स्टॉक प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आग की घटनाओं ने संदेह बढ़ाया है। हालांकि, किसी साजिश या सबूत मिटाने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अटकलों के बजाय निष्पक्ष जांच, पारदशौ रिपोर्ट और जवाबदेही तय करना जरूरी है।