Narrow gauge to broad gauge project (सोर्सः सोशल मीडिया) 
वर्धा

आर्वी-पुलगांव नैरोगेज को ब्रॉडगेज में बदले, तलेगांव-आष्टी-वरुड़ होते हुए आमला से जोड़ने की जनता की मांग

Arvi Pulgaon Railway Line: आर्वी-पुलगांव नैरोगेज रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज में बदलकर तलेगांव, आष्टी और वरुड़ होते हुए आमला से जोड़ने की मांग वर्षों से लंबित है।

आंचल लोखंडे

Arvi Rail Project Demand: आर्वी से पुलगांव तक की ब्रिटिशकालीन नैरोगेज रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज में परिवर्तित कर तलेगांव श्यामजी पंत, आष्टी और वरुड़ होते हुए आमला मिलिट्री कैंप तथा दिल्ली मुख्य रेलमार्ग से जोड़ने की मांग कई वर्षों से की जा रही है। यह मार्ग पुलगांव मिलिट्री कैंप को आमला मिलिट्री कैंप से जोड़ने के साथ-साथ क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1895 में निक्सन कंपनी (इंग्लैंड) के माध्यम से आर्वी–पुलगांव नैरोगेज रेलवे ट्रैक का निर्माण किया गया था। उस समय इस मार्ग से क्षेत्र की उत्कृष्ट कपास मुंबई भेजी जाती थी, जिसे आगे मैनचेस्टर तक निर्यात किया जाता था। इसके अलावा स्थानीय व्यापारी कपास की गांठें, सरकी, ढेप और तेल जैसी वस्तुएं पुलगांव के माध्यम से मुंबई, कोलकाता आदि शहरों तक भेजते थे। किंतु पिछले लगभग 25 वर्षों से यह नैरोगेज लाइन बंद पड़ी है।

PM का आश्वासन अधूरा

इस रेलवे मार्ग का सामरिक महत्व भी अत्यधिक है। एशिया के सबसे बड़े बारूद कारखानों में से एक पुलगांव में स्थित है। किसी भी आपात स्थिति में पुलगांव मिलिट्री कैंप से आमला मिलिट्री कैंप तक बारूद और सैन्य सामग्री के सुरक्षित परिवहन के लिए यह कम दूरी का मार्ग बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। यह लाइन दिल्ली-मुंबई-कोलकाता जैसे प्रमुख रेल मार्गों के लिए एक वैकल्पिक लूप लाइन के रूप में भी कार्य कर सकती है। बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन दोनों मिलिट्री डिपो को जोड़ने के लिए इस कम दूरी वाले मार्ग का सर्वे भी किया गया था।

अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं

पुलगांव से आर्वी तक लगभग 35 किलोमीटर की मौजूदा नैरोगेज लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं है। वहीं आर्वी से तलेगांव श्यामजी पंत, आष्टी होते हुए वरुड़ तक लगभग 55 किलोमीटर की नई लाइन के लिए आवश्यक भूमि शासन के पास उपलब्ध बताई जाती है। रेलवे लाइन न होने के कारण आर्वी विधानसभा क्षेत्र के यात्रियों को अमरावती, वरुड़, पुलगांव या वर्धा जैसे स्थानों तक 40 किलोमीटर दूर जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। इसके चलते इस क्षेत्र में बड़े या छोटे उद्योग स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। यदि यह रेलवे लाइन शुरू होती है, तो लगभग 900 गांवों-विशेषकर कारंजा, आष्टी और आर्वी तहसील-के लोगों को सीधी आवागमन सुविधा मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं

फरवरी 2015 में भाजपा पदाधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना की मांग की थी। सांसद रामदास तड़स ने भी लोकसभा में इस विषय को उठाया था। वर्ष 2014 और 2019 के चुनावों में इस रेलवे लाइन के सर्वे और शीघ्र कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया गया था, यहां तक कि इसके लिए होर्डिंग भी लगाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। इसका असर 2024 के चुनाव में भी देखने को मिला।

शीघ्र क्रियान्वयन की उम्मीद

हाल ही में सांसद अमर काले ने रेल मंत्री से चर्चा कर इस विषय को संसद में भी उठाया है। चुनाव पूर्व तलेगांव श्यामजी पंत में हुई जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रेलवे लाइन के सर्वे के लिए निधि उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। क्षेत्र की जनता को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन की उम्मीद है।

(इनपुट: सूर्यप्रकाश भट्टड)

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