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महाराष्ट्र

विलासराव देशमुख से अजित पवार तक, जब 'मौत' ने बदली महाराष्ट्र की सियासी दिशा, फिर दोहराया जाएगा इतिहास?

Ajit Pawar Death: अजित पवार की असामयिक मौत महाराष्ट्र की राजनीति, खासकर NCP गुटों पर गहरा असर पड़ेगा। इससे पहले भी महाराष्ट्र में कई राजनेताओं की मौत से सियासी उथल-पुथल देखने को मिल चुकी है।

अभिषेक सिंह

Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र ने बुधवार को अपने लंबे समय तक सेवा करने वाले उपमुख्यमंत्री को खो दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा एक चार्टर्ड विमान बारामती में लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई। अजित पवार अपने समर्थकों और रिश्तेदारों के बीच प्यार से 'अजीत दादा' के नाम से जाने जाते थे।

अजित पवार को महायुति सरकार के भीतर सत्ता का एक शक्तिशाली केंद्र माना जाता था। उनकी असामयिक मृत्यु का महाराष्ट्र की राजनीति, खासकर NCP गुटों पर गहरा असर पड़ेगा। अजित पवार से जुड़ी यह दुखद घटना महाराष्ट्र की राजनीति में होने वाली अप्रत्याशित घटनाओं की एक कड़वी याद दिलाती है, जिन्होंने बार-बार सत्ता के समीकरणों को बदला है। पिछले दो दशकों में कई प्रमुख नेताओं की समय से पहले मौत हुई है, जिससे पार्टियों और राज्य को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

भाजपा के 'किंगमेकर' को भाई ने मारी गोली

बीजेपी के करिश्माई नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रमोद महाजन अपने करियर के शिखर पर थे, जब 3 मई, 2006 को उनके छोटे भाई प्रवीण ने उन्हें गोली मार दी। उन्हें बीजेपी के सबसे ज़्यादा बोलने रणनीतिक चेहरों में से एक और 'किंगमेकर' माना जाता था। पार्टी में उनका पद अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी के बाद तीसरा सबसे बड़ा था।

अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के साथ प्रमोद महाजन (सोर्स- सोशल मीडिया)

जितेंद्र दीक्षित की किताब में दर्ज एक बातचीत में महाजन ने संकेत दिया था कि वह वाजपेयी-आडवाणी युग के बाद खुद को प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखते थे। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें 'भारतीय राजनीति का गैजेट-प्रेमी आधुनिकतावादी' और 'पहला आधुनिक स्पिन डॉक्टर' बताया गया, जिसने बीजेपी को डिजिटल युग से जोड़ा।

कार दुर्घटना में हुई BJP के 'चंद्रगुप्त' की मौत

प्रमोद महाजन के करीबी सहयोगी और बहनोई, गोपीनाथ मुंडे को बीजेपी का 'चंद्रगुप्त' कहा जाता था। दोनों ने मिलकर महाराष्ट्र की राजनीति को बदल दिया। 1980 के दशक तक मराठाओं का दबदबा था, लेकिन मुंडे ने अटल बिहारी वाजपेयी की सबको साथ लेकर चलने वाली राजनीति से प्रेरणा लेकर जाति की दीवारों को तोड़ा और आम लोगों से जुड़े।

गोपीनाथ मुंडे (सोर्स- सोशल मीडिया)

1995 में शिवसेना के साथ गठबंधन करने का उनका फैसला ऐतिहासिक था, जिससे कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। 3 जून, 2014 को दिल्ली में एक कार दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। यह दुर्घटना तब हुई जब वह ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद महाराष्ट्र जा रहे थे। उनकी मौत के बाद कुछ समय के लिए बीजेपी बिना किसी मजबूत नेता के रह गई थी।

जिस मौत से कमजोर हुआ कांग्रेस का आधार

साल 2012 में दो बार मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख का अचानक निधन से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। लातूर के धनी किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले देशमुख किसान ऋण माफी जैसे मुद्दों पर आगे रहे, जिसने यूपीए को 2009 में वापसी दिलाई। लेकिन 14 अगस्त 2012 को लीवर कैंसर से जूझते हुए 67 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। महाराष्ट्र में कांग्रेस को आज तक उनके जैसा जमीनी आधार वाला नेता नहीं मिल सका है।

विलासराव देशमुख (सोर्स- सोशल मीडिया)

क्यों ताकतवर माने जाते थे अजित पवार?

66 साल के अजित अनंतराव पवार महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी बेबाकी, प्रशासनिक काबिलियत और साहसिक फैसलों के लिए जाने जाते थे। वह 1991 से लगातार सात बार बारामती से विधायक चुने गए और हर बार भारी बहुमत से जीते। उनकी ताकत कोऑपरेटिव सेक्टर में थी। उन्होंने 16 साल तक पुणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन के तौर पर काम किया और शुगर मिलों और डेयरी कोऑपरेटिव पर उनका काफी प्रभाव था।

अजित पवार (सोर्स- सोशल मीडिया)

अजित पवार ने अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के तहत जल संसाधन, बिजली और ग्रामीण विकास जैसे अहम मंत्रालय संभाले। उनके राजनीतिक करियर में नवंबर 2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ बनी 80 घंटे की सरकार और जुलाई 2023 में NCP में हुई फूट शामिल है, जब उन्होंने अपने चाचा शरद पवार की लंबे समय से चली आ रही लीडरशिप को चुनौती देते हुए शिंदे सरकार जॉइन की थी।

अजित की मौत बदलेगी सूबे की सियासी दिशा?

अजित पवार की मौत से एनसीपी को बड़ा झटका लगा है। उनके उत्तराधिकारी के तौर पर पत्नी सुनेत्रा पवार और बेटे पार्थ पवार के साथ-साथ प्रफुल्ल पटेल का नाम लिया जा रहा है। इन तीनों ही नेताओं का कद अजित से कहीं छोटा है। यही वजह है कि अब एक बार फिर यह माना जा रहा है कि अजित पवार की मौत महाराष्ट्र की सियासी दिशा बदलने वाली साबित होगी।

इस दुखद घटना के बाद पूरा देश शोक में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, शरद पवार परिवार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संजय राउत और कई अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। महाराष्ट्र में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। अंतिम संस्कार 29 जनवरी को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

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