उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच फिर से एक साथ आने की चर्चा तेज (फोटो- सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

उद्धव-राज फिर साथ? शिवसेना UBT ने दिखाया भरोसा, कहा- अब फैसला महाराष्ट्र के हित में होगा

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के फिर से एक साथ आने और स्थानीय निकाय चुनावों की चर्चाओं के बीच राजनीतिक शांति के बीच, शिवसेना (UBT) ने कहा कि वह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख के साथ बातचीत को लेकर सकारात्मक है।

सौरभ शर्मा

मुम्बई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दो चचेरे भाइयों के मिलने की उम्मीद जगी है। शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से संभावित गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं और साफ कहा है कि अब राज ठाकरे को महाराष्ट्र के हित में अंतिम फैसला लेना चाहिए। शिवसेना नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं और भाजपा सरकार पर राजनीतिक अस्थिरता के आरोप लग रहे हैं। गठबंधन की संभावना से महाराष्ट्र की सियासत में नई हलचल देखी जा रही है।

स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर शिवसेना ने सरकार पर देरी का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक चार महीनों के भीतर चुनाव कराने चाहिए, लेकिन सरकार अंदरूनी सियासत में उलझी है। बीएमसी चुनाव में कोई आरक्षण संबंधी अड़चन नहीं है और सीटों की संख्या तय होते ही चुनाव कराए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी अब जनता के बीच जाने को तैयार है और फैसले का इंतजार कर रही है।

राजनीतिक मेलजोल की नई राह

शिवसेना (यूबीटी) ने साफ किया कि उन्होंने कभी बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए और राज्य की जनता चाहती है कि ठाकरे परिवार एकजुट हो। दोनों नेताओं के हाल के बयान और मुलाकातों से उम्मीद बनी है कि पुरानी दूरियों को भुलाया जा सकता है। हालांकि, मनसे के कुछ नेताओं की आपत्तियों ने अब तक इस प्रक्रिया को धीमा किया है, लेकिन अब बॉल राज ठाकरे के पाले में है। पार्टी ने भरोसा जताया है कि चुनाव से पहले फैसला जरूर होगा।

सरकार पर देरी और अंदरूनी झगड़ों के आरोप

शिवसेना ने भाजपा पर आरोप लगाया कि सत्ता में होने के बावजूद सरकार असंतुलन और आपसी खींचतान में फंसी हुई है। राज्य मंत्रिमंडल में विवादित नेताओं को शामिल किए जाने और कार्यकर्ताओं की अनदेखी से असंतोष बढ़ा है। बीएमसी चुनाव की देरी को भी इसी का हिस्सा बताया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि अगर सरकार तय करे तो कल ही चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन जानबूझकर प्रक्रिया को लंबा खींचा जा रहा है।

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