PWD Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया) 
ठाणे

ठाणे-घोडबंदर सड़क चौड़ीकरण पर अनिश्चितता, जिम्मेदारी फिर पीडब्ल्यूडी को सौंपने का निर्णय

Thane Ghodbunder Road Widening: ठाणे-घोडबंदर सड़क चौड़ीकरण परियोजना पर अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि मीरा-भाईंदर मनपा ने वित्तीय बोझ के चलते परियोजना फिर से पीडब्ल्यूडी को सौंपने का निर्णय लिया है।

आंचल लोखंडे

Mira Bhayander Municipal Corporation: मीरा-भाईंदर और ठाणे को जोड़ने वाली ठाणे–घोडबंदर सड़क के बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण प्रकल्प पर अनिश्चितता गहरा गई है। बढ़ते यातायात दबाव और वित्तीय चुनौतियों के बीच मीरा-भाईंदर महानगरपालिका ने सड़क को पुनः राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सौंपने का निर्णय लिया है। मनपा की हाल ही में हुई महासभा में यह प्रस्ताव पारित किया गया। इससे परियोजना की समयसीमा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

करीब छह किलोमीटर लंबे फाउंटेन होटल से गायमुख तक के हिस्से में प्रतिदिन भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़क संकरी, घुमावदार और चढ़ाई वाली होने के कारण यातायात की रफ्तार धीमी रहती है। मीरा-भाईंदर, वसई-विरार और ठाणे के बीच रोजाना आवागमन करने वाले हजारों यात्रियों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन की हानि के साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है।

चौड़ीकरण की योजना और वित्तीय चुनौती

राज्य सरकार ने इस मार्ग की चौड़ाई 30 मीटर से बढ़ाकर 60 मीटर करने की योजना को मंजूरी दी थी। जुलाई 2025 में यह सड़क सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग से मनपा को हस्तांतरित की गई थी। योजना के अनुसार चौड़ीकरण का कार्य मनपा को करना था और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी भी उसी के पास थी। हालांकि, बीते सात महीनों में सड़क के आधे हिस्से की मरम्मत पर ही लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अनुमान है कि चौड़ीकरण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण पर करीब 150 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। इसके अतिरिक्त, वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होने तक अगले दो से तीन वर्षों में रखरखाव पर लगभग 50 करोड़ रुपये और खर्च होने की संभावना है। इन परिस्थितियों में मनपा ने आर्थिक बोझ वहन करने में असमर्थता जताई है।

सड़क के पुनर्वर्गीकरण की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी

मनपा महासभा के निर्णय के बाद अब प्रशासन सड़क के पुनर्वर्गीकरण की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क औपचारिक रूप से फिर से लोक निर्माण विभाग के अधीन आ जाएगी। इसके बाद आगे की कार्यवाही और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार को निर्णय लेना होगा।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह मार्ग मीरा-भाईंदर, वसई-विरार और ठाणे के बीच जीवनरेखा की तरह है। लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए चौड़ीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। फिलहाल सबकी निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, ताकि वर्षों से लंबित इस परियोजना को गति मिल सके और यात्रियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिल सके।

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