आश्रम स्कूल में आदिवासी छात्र की मौत (सोर्स: AI)
ठाणे

चार दिन बुखार से तपता रहा 11 साल का आदिवासी छात्र, ठाणे के स्कूल में मौत; परिजनों ने शव लेने से किया इनकार

Thane Ashram School Student Death Case: ठाणे के पिसे स्थित सरकारी आश्रम स्कूल में 11 वर्षीय आदिवासी छात्र की बुखार के बाद मौत हो गई। परिजनों की शिकायत पर प्रधानाचार्य, शिक्षक और वार्डन निलंबित हुए।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • भिवंडी के पिसे स्थित आश्रम स्कूल में 11 वर्षीय आदिवासी छात्र की मौत हुई।

  • समय पर इलाज नहीं मिलने के आरोपों के बाद प्रधानाचार्य, शिक्षक और वार्डन निलंबित किए गए।

  • शाहपुर पुलिस ने तीनों के खिलाफ FIR दर्ज की, मामले की जांच हो रही है।

3 School Staff Suspended In Thane: राज्य के आश्रम विद्यालयों में लापरवाही की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। ठाणे जिले में एक सरकारी आश्रम स्कूल से सामने आई घटना ने बच्चों की सुरक्षा और सरकारी आवासीय विद्यालयों में स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भिवंडी तालुका के पिसे स्थित सरकारी आश्रम स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले 11 वर्षीय आदिवासी छात्र विवेक सुभाष भोये की बुखार के बाद संदिग्ध हालत में मौत हो गई।

परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर समय रहते सूचना नहीं देने और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। मामले में तत्काल जांच के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य, एक शिक्षक और छात्रावास के वार्डन को निलंबित कर दिया गया है।

समय पर नहीं मिला इलाज ?

बताया गया है कि विवेक को कथित तौर पर चार दिनों से तेज बुखार था। शुक्रवार को छात्रावास के वार्डन राहुल जांजल ने उसकी मां को फोन कर बच्चे की तबीयत खराब होने और उसे शाहपुर के सरकारी अस्पताल ले जाने की जानकारी दी। बेटे की बीमारी की सूचना मिलने पर मां स्कूल पहुंचीं। वहां उन्होंने विवेक को सांस लेने में तकलीफ से जूझते देखा।

मां ने स्कूल के प्रधानाचार्य जयवंत सपले, वार्डन राहुल जांजल और कक्षा शिक्षक अशोक साल्वे से सवाल किया कि बच्चे की गंभीर हालत के बारे में पहले सूचना क्यों नहीं दी गई और उसे समय पर उचित चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिली। शिकायत के मुताबिक, उनकी बातों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

अस्पताल में आधे घंटे बाद मौत

इसके बाद स्कूल के कर्मचारी और विवेक की मां उसे शाहपुर के सरकारी अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने बच्चे का इलाज शुरू किया, लेकिन करीब आधे घंटे बाद विवेक की मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल में स्कूल के कर्मचारियों ने परिवार के सदस्यों को बाहर इंतजार करने के लिए कहा।

बच्चे की मौत के बाद कर्मचारी कथित तौर पर अस्पताल परिसर से चले गए। इस घटनाक्रम ने स्कूल प्रशासन की भूमिका और बच्चे को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मामले में लापरवाही की जिम्मेदारी और मौत के वास्तविक कारणों का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।

घटना की जांच

जनजातीय विकास विभाग की परियोजना अधिकारी तेजस्विनी गलांडे के अनुसार घटना की तत्काल जांच के बाद लापरवाही के आरोप में प्रधानाचार्य जयवंत सपले, शिक्षक अशोक साल्वे और छात्रावास के वार्डन राहुल जांजल को निलंबित कर दिया गया है।

छात्र की मां की शिकायत के आधार पर ठाणे जिले की शाहपुर पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

शव लेने से किया इनकार

विवेक की मौत के बाद स्थानीय लोगों और आदिवासी संगठनों में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने शाहपुर स्थित जनजातीय विकास विभाग के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए छात्र का शव लेने से इनकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों गढ़चिरौली के एक आश्रम विद्यालय में सांप काटने से 3 आदिवासी छात्राओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। राज्य के सरकारी एवं अनुदानित आश्रम विद्यालयों में अव्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

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