Pratap Sarnaik Warning: मुंबई एमएमआर सहित राज्य भर में रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए व्यवहारिक मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के बाद 1 लाख से ज्यादा अमराठी ड्राइवरों ने मराठी भाषा का प्रशिक्षण ‘हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे मराठी शिकवणी अभियान’ के तहत लिया है।
ऐसी जानकारी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में व्यवसाय करना है तो मराठी का बुनियादी ज्ञान होना जरूरी है। महाराष्ट्र में रोजगार करना है तो मराठी से नाता जोड़ना ही पड़ेगा। यह जबरदस्ती नहीं, बल्कि अपनत्व की भाषा है। उन्होंने बाकी अमराठी चालकों से भी 15 अगस्त से पहले प्रशिक्षण पूरा करने की अपील की।
परिवहन मंत्री ने बताया कि मुंबई मराठी साहित्य संघ, राज्य मराठी विकास संस्था और कोकण मराठी साहित्य परिषद के सहयोग से अमराठी चालकों के लिए चलाए गए अभियान को जबरदस्त सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि इसका समापन समारोह 17 अगस्त को ठाणे के गडकरी रंगायतन में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार और मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत उपस्थित रहेंगे। इस मौके पर व्यवहारिक मराठी का प्रशिक्षण पूरा करने वाले हजारों अमराठी व्यावसायिक वाहन चालकों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए जाएंगे।
परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने मानवतावादी दृष्टिकोण से अमराठी चालकों को मराठी सीखने का मौका दिया। इस अभियान के जरिए हजारों चालकों ने मराठी सीखने का प्रयास किया है।प्रमाणपत्र को लेकर मंत्री ने स्पष्ट किया कि कोकण मराठी साहित्य परिषद द्वारा दिया जाने वाला प्रमाणपत्र केवल अभियान में भागीदारी का प्रमाण है। केवल प्रमाणपत्र दिखाने से कार्रवाई नहीं टलेगी।
आरटीओ अधिकारी चालकों से मराठी में संवाद करेंगे। अगर चालक मराठी में उत्तर दे पाया, तभी उसे नियमों का पालन करने वाला माना जाएगा। नियमों का पालन न करने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। आरटीओ अधिकारी जांच करेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे। सरनाईक ने कहा, जो चालक यात्रियों से दो प्रेम के शब्द मराठी में बोलता है, वह महाराष्ट्र की संस्कृति का सम्मान करने वाला दूत बन जाता है।
मराठी सिर्फ भाषा नहीं, अस्मिता
ठाणे में आयोजित पत्रकार परिषद में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि मराठी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की अस्मिता और संस्कृति की आत्मा है। हम किसी के विरोध में नहीं हैं। जो भी महाराष्ट्र और मराठी भाषा से प्रेम करता है, वह हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। लेकिन महाराष्ट्र में काम करते समय मराठी का सम्मान करना जरूरी है।
इस अवसर पर कोंकण मराठी साहित्य परिषद के कार्याध्यक्ष प्रा.प्रदीप ढवल, ठाणे विभागीय आरटीओ अधिकारी हेमांगिनी पाटिल सहित मराठी साहित्य परिषद के पदाधिकारी उपस्थित थे।
मराठी नागरिकों से भी अपील
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मराठी यात्रियों से भी अपील की कि वे सामने वाले चालक को हिंदीभाषी मानकर हिंदी में बात न करें। मराठी भाषी अगर मराठी में ही संवाद करेंगे तो मराठी का उपयोग और बढ़ेगा। मराठी का सम्मान करने की जिम्मेदारी सिर्फ चालकों की नहीं, बल्कि हर मराठी नागरिक की है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन के मराठी भाषा विभाग, मुंबई मराठी साहित्य संघ, राज्य मराठी विकास संस्था और कोकण मराठी साहित्य परिषद के संयुक्त सहयोग से चलाए गए इस अभियान ने राज्यभर में जनांदोलन का रूप ले लिया है।