कल्याण डोंबिवली मनपा (सौ. सोशल मीडिया ) 
ठाणे

Maharashtra Politics: सीट शेयरिंग पर तकरार, केडीएमसी में आमने-सामने आ सकती है महायुति

Maharashtra Local Body Election: कल्याण-डोंबिवली मनपा चुनाव से पहले महायुति में खींचतान तेज हो गई है। भाजपा ने 83 सीटें और पूरे कार्यकाल के लिए महापौर पद की शर्त रखी है।

अपूर्वा नायक

Kalyan Dombivli News In Hindi: कल्याण- डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव से पहले महायुति में सीट बंटवारे को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है।

भाजपा ने साफ शब्दों में संकेत दिया है कि यदि शिवसेना (शिंदे गुट) 122 सदस्यीय सदन में 83 सीटें और पूरे पांच वर्षों के लिए महापौर पद भाजपा को देने पर सहमत होती है, तभी दोनों दलों के बीच युति संभव है।

अन्यथा भाजपा अपने बल पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह स्पष्ट चेतावनी भाजपा के कल्याण के पूर्व विधायक और महायुति समन्वय समिति के सदस्य नरेंद्र पवार ने मीडिया के सामने दी।

पवार ने बताया कि भाजपा द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वेक्षण में कल्याण-डॉचिवली में पार्टी को 80 से अधिक सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। बीते पांच वर्षों में शहर में भाजपा का जनाधार मजबूत हुआ है और पार्टी एकजुट होकर मैदान में है।

ऐसे में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए शिवसेना द्वारा पुराने गणित के आधार पर सीटों का बंटवारा स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव को दस वर्ष बीत चुके हैं और इस दौरान मतदाताओं की प्राथमिकताएं बदली हैं।

अब जनता काम करने वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को पहचानती है। शिवसेना के विभाजन के बाद उसके नगरसेवकों और संगठनात्मक ताकत में बंटवारा हुआ है, जबकि भाजपा इस समय एकसंध और मजबूत स्थिति में है।

महापौर पद पर भी सख्त रुखनरेंद्र पवार ने स्पष्ट किया कि पूर्व में कई अवसरों पर भाजपा ने राजनीतिक समन्वय बनाए रखने के लिए महापौर पद छोड़ दिया, लेकिन शिवसेना ने कभी भाजपा को इस पद के लिए गंभीरता से नहीं माना। "अब ऐसा नहीं होगा, कहते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि यदि युति करनी है तो महापौर पद पर भाजपा का अधिकार स्वीकार करना होगा।

कार्यकर्ताओं की होगी भूमिका अहम

  • पवार ने यह भी कहा कि दोनों दलों के जमीनी कार्यकर्ताओं में युति को लेकर मिश्रित भावनाएं हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि युति का फैसला कार्यकर्ताओं की भावना को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। इसलिए शिवसेना और भाजपा नेतृत्व को अपने शब्दों पर कायम रहना चाहिए।
  • कुल मिलाकर, कल्याण-डोंबिवली में भाजपा ने सीट शेयरिंग और महापौर पद को लेकर अपनी शर्तें सार्वजनिक कर दी हैं। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि शिवसेना इन शर्तों को मानकर युति बनाए रखती है या फिर केडीएमसी चुनाव में दोनों दल आमने-सामने नजर आएंगे।

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