बाल संत समागम (सोर्स: नवभारत)
ठाणे

भिवंडी में निरंकारी बाल संत समागमं संपन्न: बच्चों ने बिखेरी प्यार, नम्रता और संस्कारों की छटा

Nirankari Bal Sant Samagam: भिवंडी के टेमघर पाड़ा में निरंकारी बाल संत समागम संपन्न हुआ। इसमें बच्चों ने 7 भाषाओं में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और नम्रता व दैवीय संस्कारों का संदेश दिया।

अशोक वर्मा, गोरक्ष पोफली

Sant Nirankari Mission Dombivli Zone: भिवंडी के टेमघर पाड़ा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित निरंकारी 'बाल संत समागम' में सिस्टर अंचल आहूजा ने कहा कि आध्यात्मिक झुकाव वाले और अच्छे संस्कारों वाले बच्चे ही कल के उज्ज्वल भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें इस सभा में मार्गदर्शन देने के लिए विशेष रूप से हैदराबाद से आमंत्रित किया गया था।

संत निरंकारी मिशन के डोंबिवली ज़ोन के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निरंकारी बच्चों और उनके माता-पिता ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन में भिवंडी, डोंबिवली, कल्याण, उल्हासनगर, बदलापुर, टिटवाला और कसारा सहित विभिन्न क्षेत्रों से लोग शामिल हुए।

प्यार और करुणा आत्मसात कर रहे बच्चे

सिस्टर अंचल आहूजा ने कहा कि 'बाल सत्संग' (बच्चों का आध्यात्मिक सम्मेलन) में भाग लेने वाले बच्चे सतगुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपना रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाल सत्संग बच्चों के जीवन को सकारात्मक दिशा देता है और उन्हें नकारात्मक गुणों से दूर रहने में मदद करता है। इन आयोजनों के माध्यम से वे बचपन में ही दैवीय गुणों जैसे प्यार, विनम्रता, करुणा और उदारता को आत्मसात करने लगते हैं। ये गुण न केवल उनके अपने जीवन को, बल्कि दूसरों के जीवन को भी लाभान्वित करते हैं।

बाल संत समागम

7 भाषाओं में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

अंत में उन्होंने भाग लेने वाले बच्चों से सत्संग से जुड़े रहने, सच्चे मन से परमात्मा की भक्ति करने और हर किसी में निराकार ईश्वर (निरंकार) का रूप देखने का आग्रह किया। उन्होंने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के चरणों में प्रार्थना भी की जिसमें इन युवा भक्तों के जीवन में खुशी, शांति, संतोष और सफलता की कामना की गई और यह उम्मीद जताई गई कि उनके माध्यम से निराकार ईश्वर का ज्ञान सभी तक पहुंचेगा।

बाल भक्तों की इस सभा में, विभिन्न क्षेत्रों के बच्चों ने मराठी भाषा, हिंदी, पंजाबी, अंग्रेजी, बंजारा, पहाड़ी और नेपाली जैसी भाषाओं में भक्ति गीतों, अभंगों, भाषणों, कविताओं और लघु नाटकों के माध्यम से दर्शकों तक संत निरंकारी मिशन का संदेश पहुंचाया। इसके अलावा, बच्चों ने अलग-अलग विषयों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई।

बाल संत समागम

प्रदर्शनी में बच्चों ने प्रस्तुत किए आध्यात्मिक मॉडल

इस प्रदर्शनी में मुक्ति, क्रोध का त्याग, सत्संग-सेवा-स्मरण (आध्यात्मिक सभा, निस्वार्थ सेवा और ईश्वर का स्मरण), जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि, कृतज्ञता, अंतर्मन की सुंदरता, गुरुमत (सच्चे गुरु की शिक्षाएं) की सीढ़ी, ईश्वरीय ज्ञान का सही और गलत इस्तेमाल, अच्छे संस्कार, सच्चे गुरु के ज़रिए मुक्ति का रास्ता, सच्चे ज्ञान की पहचान, मन का आईना, गूगल मैप्स से सद्गुरु मैप्स तक,जीवात्मा से परमात्मा तक का सफ़र और 'ज्ञान का वृक्ष' जैसे विषयों पर मॉडल और डिस्प्ले शामिल थे।

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