Sumit Patil vs Narayan Chaudhary (फोटो क्रेडिट-X) 
ठाणे

Bhiwandi: 'बीजेपी में सिर फुटव्वल', मेयर बनने को लेकर आपस में भिड़े सुमित पटेल-नारायण चौधरी

Sumit Patil vs Narayan Chaudhary: भिवंडी में महापौर पद के लिए बीजेपी के सुमित पाटिल और नारायण चौधरी आमने-सामने हैं। सुमित ने चौधरी की पार्टी सदस्यता पर सवाल उठाए हैं।

अनिल सिंह

Bhiwandi Mayor Election 2026: भिवंडी निजामपुर नगर निगम (BNCMC) के महापौर चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर गुटबाजी और कलह चरम पर पहुँच गई है। मेयर पद की उम्मीदवारी को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल के भतीजे सुमित पाटिल और नारायण चौधरी के बीच शुरू हुआ विवाद अब सार्वजनिक हो गया है। जहाँ एक तरफ पार्टी नेतृत्व ने नारायण चौधरी के नाम पर मुहर लगाई है, वहीं सुमित पाटिल ने चौधरी की पार्टी सदस्यता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। इस 'सिर फुटव्वल' ने आगामी चुनाव में बीजेपी की राह मुश्किल कर दी है।

पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति है और सोशल मीडिया पर दोनों गुटों द्वारा अपने-अपने नेताओं को भावी महापौर बताने वाले पोस्ट की बाढ़ आ गई है।

सदस्यता पर सवाल: "चौधरी बीजेपी के सदस्य ही नहीं"

नगरसेवक सुमित पाटिल ने पार्टी के फैसले के खिलाफ बगावती तेवर अपनाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। पाटिल का दावा है कि नारायण चौधरी चुनाव से ठीक पहले पार्टी में शामिल हुए थे और अभी तक वे बीजेपी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं बने हैं। सुमित पाटिल ने सवाल उठाया कि "जो व्यक्ति पार्टी का आधिकारिक सदस्य तक नहीं है, उसे प्रदेश अध्यक्ष महापौर पद का उम्मीदवार कैसे बना सकते हैं?" पाटिल ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करने की बात कही है, जिससे गठबंधन के भीतर भी हलचल बढ़ गई है।

नारायण चौधरी का दावा: "मेरे पास प्रदेश अध्यक्ष का पत्र"

दूसरी ओर, नारायण चौधरी अपनी उम्मीदवारी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने सुमित पाटिल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पास बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक पत्र मौजूद है। चौधरी के समर्थकों का कहना है कि पार्टी ने उनकी योग्यता और शहर में उनकी पकड़ को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी है। शहर अध्यक्ष रवि सावंत ने भी पुष्टि की है कि उन्हें प्रदेश कार्यालय से चौधरी के नाम का पत्र प्राप्त हुआ है और वरिष्ठों का निर्णय ही अंतिम होगा।

बहुमत का गणित: 46 का आंकड़ा और 'विकास' का सहारा

भिवंडी मनपा में सत्ता हथियाने के लिए बीजेपी को कड़ी मशक्कत करनी होगी। वर्तमान में संख्या बल कुछ इस प्रकार है:

  • बीजेपी: 22 नगरसेवक
  • शिंदे सेना: 12 नगरसेवक
  • निर्दलीय: 01 नगरसेवक
  • कुल योग: 35 (बहुमत के लिए 46 की आवश्यकता)

बीजेपी को जादुई आंकड़ा छूने के लिए अभी भी 11 और नगरसेवकों के समर्थन की जरूरत है। शहर अध्यक्ष रवि सावंत का दावा है कि अन्य पार्टियों के कई नगरसेवक विकास के मुद्दे पर बीजेपी के संपर्क में हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर जारी इस खींचतान ने विपक्षी दलों को मौका दे दिया है, जिससे 11 फरवरी को होने वाले चुनाव में क्रास वोटिंग का खतरा बढ़ गया है।

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