Metro Car Shed (सोर्सः सोशल मीडिया) 
ठाणे

डोंगरी की सरकारी जमीन पर फिर कब्जा, ठंडे बस्ते में मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट, भूमाफिया पुनः सक्रिय

Bhayandar Dongri Encroachment: भाईंदर के डोंगरी इलाके में मेट्रो कार शेड के लिए प्रस्तावित सरकारी जमीन पर दोबारा अतिक्रमण बढ़ने से एमएमआरडीए की परियोजना और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

आंचल लोखंडे

Mumbai Metro Car Shed Controversy: भाईंदर पश्चिम में उत्तन के डोंगरी इलाके में प्रस्तावित मेट्रो कार शेड की जमीन एक बार फिर अतिक्रमण की गिरफ्त में है। करीब 59 हेक्टेयर (79 एकड़) सरकारी जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियां दोबारा तेजी से बसने लगी हैं। पहले की गई तोड़फोड़ कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमण का लौटना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?

मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने अंधेरी-दहिसर से आगे भाईंदर तक मेट्रो विस्तार के तहत डोंगरी सर्वे नंबर 19 की भूखंड पर में कार शेड बनाने की योजना बनाई थी। यह भूखंड राजस्व विभाग से एमएमआरडीए को सौंप दी गई थी, टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी और ठेकेदार की नियुक्ति भी हो गई थी, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि और झुग्गी माफियाओं ने मौके का फायदा उठाकर जमीन पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया।

मुआवजे के लालच में खड़ी हुईं झोपड़ियां

जानकारी के मुताबिक, मुआवजा पाने की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोगों ने यहां झोपड़ियां बनाईं। झोपड़ियों को नंबर दिए गए, निर्माण सामग्री लाने के लिए अस्थायी सड़क बनाई गई, बाकायदा सर्वे भी किया गया। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने समय रहते कोई सख्त कदम नहीं उठाया था।

विरोध के बाद बदली योजना

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव से पहले मेट्रो कार शेड को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। हालांकि, अब तक इसकी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इसी असमंजस का फायदा उठाकर अतिक्रमण माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं।

झोपड़ी के नाम पर लाखों की वसूली

स्थानीय सूत्रों के अनुसार सर्वे रसीद के लिए प्रति झोपड़ी करीब 2 लाख रुपए, बिजली कनेक्शन के लिए करीब 1 लाख रुपए, झोपड़ियां 8-10 लाख रुपए में बेची जा रही थीं। सितंबर 2025 को इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद मनपा ने कार्रवाई करते हुए कुछ झोपड़ियां हटाईं, लेकिन यह कार्रवाई अधूरी ही रही।

तोड़फोड़ के बाद फिर बढ़ा अतिक्रमण

सरकारी जमीन पर कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए अतिक्रमण रुका, लेकिन अब फिर से झोपड़ियां बसनी शुरू हो गई हैं। वहीं, निजी जमीन पर बने अतिक्रमण अब भी जस के तस हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब किसी राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है।

10 हजार पेड़ों पर भी खतरा

इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 10 हजार पेड़ों को हटाने की योजना थी, जिसे लेकर पहले ही विरोध हो चुका है। अब अतिक्रमण के कारण पर्यावरण और शहरी विकास दोनों प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी गणेश पाटील का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए होती है। कुछ दिन बाद फिर वही हाल हो जाता है।

पर्यावरण प्रेमी एड ।कृष्णा गुप्ता और हर्षद ढगे का आरोप है कि सरकारी जमीन पर खुलेआम कब्जा हो रहा है और जिम्मेदार विभाग चुप हैं। यह आश्चर्यजनक है। आखिर कार्रवाई के बाद भी अतिक्रमण कैसे लौट आया? क्या माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है? और सबसे अहम-प्रशासन कब जागेगा? ऐसे सवाल फिलहाल अनुत्तरित हैं। डोंगरी की यह जमीन वर्तमान में योजनाओं से ज्यादा अव्यवस्था और अतिक्रमण की कहानी बनती जा रही है।

(इनपुटः विनोद मिश्रा)

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