सरकारी सख्ती से चीनी 50 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हुई।
बारिश से गुड़ की आवक घटी, भाव 100–300 रुपये बढ़े।
मांग बढ़ने से शक्कर 200 और खांडसारी 100 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई।
Jaggery And Khandsari Rates Rise: महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की सख्ती का असर चीनी बाजार पर दिखाई देने लगा है।
डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अवधि और मात्रा सीमित किए जाने से मिल डिलीवरी चीनी के भाव में गिरावट दर्ज की गई, जबकि ग्राहकी निकलने और आवक कमजोर रहने से गुड़, शक्कर तथा खांडसारी की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है। चीनी के मिल डिलीवरी भाव 50 रुपये घटे हैं।
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उदय सुरेशभाई ठक्कर के अनुसार, स्थानीय बाजारों में गुड़ के भाव 100 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए, जबकि चीनी 50 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो गई।
त्योहारी सीजन में सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण के उद्देश्य से डीलरों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की अवधि 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है। इसके साथ ही स्टॉक की मात्रा 1,000 क्विंटल निर्धारित की गई है।
सरकारी सख्ती के चलते चीनी मिलों द्वारा कम भाव बोले जाने से मिल डिलीवरी चीनी 50 रुपये घटकर 4,500 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। वहीं, हाजिर बाजार में चीनी के भाव 4,850 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बोले गए।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी वायदा में तेजी देखने को मिली। सटोरिया लिवाली के समर्थन से लंदन चीनी वायदा दिसंबर डिलीवरी के भाव 508.80 डॉलर से बढ़कर 532.60 डॉलर प्रति टन हो गए। दूसरी ओर, आवक कमजोर रहने से खांडसारी के भाव 100 रुपये बढ़कर 6,200 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए।
वर्षा के कारण उत्तर प्रदेश की शामली, मुरादनगर और हापुड़ मंडियों में नए गुड़ की आवक प्रभावित हुई। हापुड़ मंडी में गुड़ बाल्टी के भाव 1,850-1,880 रुपये से बढ़कर 2,100-2,150 रुपये प्रति 40 किलोग्राम हो गए।
प्रदेश की मंडियों में नए गुड़ की आवक लगभग 2,000 कट्टों तक सीमित रहने से कीमतों को सहारा मिला। इसके परिणामस्वरूप गुड़ पेड़ी और चाकू के भाव 100 से 300 रुपये की तेजी के साथ 6,000-6,100 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए।
बाजार में बिकवाली कमजोर रहने और ग्राहकी का समर्थन मिलने से शक्कर के भाव भी 200 रुपये बढ़कर 6,000 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। कुल मिलाकर, सरकारी नियंत्रण से चीनी के घरेलू भाव दबाव में रहे, जबकि बारिश से प्रभावित आवक और मांग के चलते गुड़, शक्कर व खांडसारी में तेजी बनी रहने की संभावना है।