

CMIA ने संभाजीनगर-परभणी और अंकाई रेल मार्गों के दोहरीकरण में तेजी की मांग की।
बिडकीन और पोटूल में माल ढुलाई केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
जालना ड्राई पोर्ट को समुद्री बंदरगाहों से जोड़ने और पुणे रेल मार्ग के सर्वे में तेजी की मांग की।
Marathwada Rail Network Expansion: मराठवाड़ा में औद्योगिक विकास को गति देने, परिवहन लागत घटाने और निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने के लिए चेंबर ऑफ मराठवाड़ा इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (सीएमआईए) ने रेल नेटवर्क के विस्तार की मांग उठाई है।
संगठन ने छत्रपति संभाजीनगर-परभणी और छत्रपति संभाजीनगर-अंकाई रेल मार्गों के दोहरीकरण में तेजी लाने, बिडकीन और पोटूल में माल ढुलाई केंद्र विकसित करने तथा जालना के शुष्क बंदरगाह को समुद्री बंदरगाहों से जोड़ने का प्रस्ताव रखा है।
संगठन का मानना है कि औद्योगिक विकास के अनुरूप रेल सुविधाएं उपलब्ध होने से कच्चे माल की आपूर्ति आसान होगी और तैयार उत्पादों को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने में समय तथा खर्च की बचत होगी। सीएमआईए ने 9 अक्टूबर को हैदराबाद में वरिष्ठ रेल अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्र की औद्योगिक आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को सामने रखा।
बैठक में दक्षिण मध्य रेलवे की प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक इति पांडे, दक्षिण तटीय रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक के। संबाशिव राव तथा रेल मंत्रालय और विभिन्न रेलवे कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सीएमआईए के अध्यक्ष अथर्वेशराज नंदावत ने संगठन की ओर से रेल सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया।
छत्रपति संभाजीनगर, ऑरिक सिटी, शेंद्रा, बिडकीन, वालूज और जालना में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। ऐसे में कच्चे माल की आवक और तैयार उत्पादों की ढुलाई के लिए मजबूत रेल नेटवर्क आवश्यक है। सीएमआईए ने कहा कि रेल सुविधाओं का नियोजन औद्योगिक मांग बढ़ने के बाद करने के बजाय विकास की प्रक्रिया के साथ ही किया जाना चाहिए।
रेल से माल ढुलाई बढ़ने पर सड़क परिवहन पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे परिवहन खर्च घटाने, आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने और मराठवाड़ा के उद्योगों की राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सीएमआईए ने छत्रपति संभाजीनगर-परभणी और छत्रपति संभाजीनगर-अंकाई रेल मार्गों के दोहरीकरण कार्य में तेजी लाने की मांग की। इन परियोजनाओं से रेल यातायात की क्षमता बढ़ाने और मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारु बनाने में सहायता मिल सकती है।
इसके साथ ही ऑरिक सिटी-शेंद्रा-बिडकीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए बेहतर रेल संपर्क विकसित करने पर जोर दिया गया। बिडकीन में समर्पित माल ढुलाई केंद्र बनने से कच्चे माल की आवक और तैयार उत्पादों की ढुलाई अधिक व्यवस्थित ढंग से की जा सकेगी।
पोटूल स्थित गतिशक्ति माल ढुलाई केंद्र को शीघ्र चालू करने की मांग भी रखी गई। इसे छत्रपति संभाजीनगर, ऑरिक सिटी, वालूज और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए प्रमुख माल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।
संगठन ने जालना के शुष्क बंदरगाह, ऑरिक सिटी और छत्रपति संभाजीनगर को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह तथा वधावन बंदरगाह से जोड़ने वाले एकीकृत रेल नेटवर्क की आवश्यकता बताई। इससे निर्यातकों को समुद्री बंदरगाहों तक माल पहुंचाने के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती परिवहन विकल्प मिल सकते हैं।
सीएमआईए ने इस्पात, एल्युमिनियम, मशीनों, बैटरियों, रसायनों और औद्योगिक उपकरणों की आवक के साथ मोटर वाहनों, विद्युत वाहनों, वाहन कलपुर्जों, औषधियों तथा अभियांत्रिकी उत्पादों की ढुलाई को ध्यान में रखकर रेल क्षमता का नियोजन करने की मांग की।
प्रस्तावित छत्रपति संभाजीनगर-अहिल्यानगर-पुणे रेल मार्ग के सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह भी किया गया। इस मार्ग से पुणे, रांजणगांव, चाकण और दिघी बंदरगाह की दिशा में औद्योगिक संपर्क मजबूत करने की संभावना है।
सीएमआईए ने प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के अंतर्गत छत्रपति संभाजीनगर और आसपास के क्षेत्रों को प्रमुख औद्योगिक तथा माल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। रेल प्रशासन और उद्योग जगत के बीच समन्वय बेहतर बनाने के लिए औद्योगिक संगठनों की कार्यकारी समितियों में रेल अधिकारियों को प्रतिनिधित्व देने का प्रस्ताव भी रखा गया।
संगठन के अनुसार, रेल मार्गों का दोहरीकरण, औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर रेल संपर्क, माल ढुलाई केंद्रों का विकास और समुद्री बंदरगाहों तक एकीकृत परिवहन व्यवस्था मराठवाड़ा के औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती है। इससे निवेश आकर्षित करने, उत्पादन लागत घटाने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।