ईश्वरपुर नगर परिषद के नगराध्यक्षआनंदराव मलगुंडे व उनके भाई 
सांगली

शरद पवार गुट को राहत, ईश्वरपुर नगराध्यक्ष मलगुंडे की अयोग्यता पर रोक, फडणवीस से जयंत पाटिल की मुलाकात का असर

Ishwarpur Municipal Council News: ईश्वरपुर के नगराध्यक्ष आनंदराव मलगुंडे और उनके भाई की अयोग्यता पर नगर विकास विभाग ने रोक लगा दी है। जयंत पाटिल ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी।

आकाश मसने

Ishwarpur Municipal Council President Anandrao Malgunde Disqualification Stay: महाराष्ट्र की राजनीति में जारी घमासान के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को सांगली जिले के ईश्वरपुर नगर परिषद मामले में बहुत बड़ी कानूनी व राजनीतिक राहत मिली है। कथित निर्माण अनियमितता के आरोप में अयोग्य घोषित किए गए ईश्वरपुर नगर परिषद के नगराध्यक्ष आनंदराव मलगुंडे के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई पर राज्य के नगर विकास विभाग ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। इस स्थगन आदेश के साथ ही अगली आधिकारिक सुनवाई होने तक मलगुंडे का नगराध्यक्ष पद पूरी तरह सुरक्षित और बरकरार रहेगा।

कुछ दिन पहले अयोग्य घोषित किए गए ईश्वरपुर के नगराध्यक्ष आनंदराव मलगुंडे के खिलाफ की गई कार्रवाई पर राज्य के नगर विकास विभाग ने फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही अगली सुनवाई तक उनका नगराध्यक्ष पद बरकरार रहेगा।

जिलाधिकारी ने रद्द की थी सदस्यत

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता जयंत पाटिल के करीबी माने जाने वाले आनंदराव मलगुंडे को सांगली के जिलाधिकारी मैनाक घोष ने कथित निर्माण अनियमितता के मामले में अयोग्य घोषित किया था। इसी कार्रवाई के तहत उनके भाई और नगरसेवक सुनील मलगुंडे की सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी। हालांकि अब नगर विकास विभाग ने दोनों के खिलाफ की गई अयोग्यता की कार्रवाई पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है।

जयंत पाटिल की मध्यस्थता से मिली राहत

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल तुरंत एक्शन में आए। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की थी. इसके बाद नगर विकास विभाग ने मामले की अगली सुनवाई तक कार्रवाई पर रोक लगा दी.

क्या था निर्माण अनियमितता का पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद ईश्वरपुर शहर के पेठ सांगली रोड स्थित बस स्टैंड के पास आनंदराव और उनके भाई सुनील मलगुंडे के संयुक्त स्वामित्व वाली लॉजिंग एवं शॉपिंग सेंटर इमारत से जुड़ा है। आरोप है कि सड़क से सटी इस इमारत के निर्माण और नियमितीकरण में नियमों का उल्लंघन किया गया।

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी के समक्ष मलगुंडे को पद से हटाने की मांग की थी। आरोप लगाया गया था कि उन्होंने नगराध्यक्ष रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर निर्माण कराया। सुनवाई के बाद जिलाधिकारी ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था, लेकिन अब उस आदेश पर रोक लगने से फिलहाल उनका पद सुरक्षित हो गया है।

देश की पहली डिजिटल जनगणना का पूरा शेड्यूल जारी, UP-पंजाब समेत इन राज्यों में अभी नहीं होगी गिनती

कुछ BJP नेताओं ने ही मणिपुर में करवाए दंगे, बीरेन सिंह ने कहा- मुझे हटाने के लिए रची साजिश

Kal Ka Mausam: अक्टूबर के आखिरी दिन बदलेगा मौसम का मिजाज, कई राज्यों में बारिश की चेतावनी

बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश, बेंगलुरु के 5 यात्रियों की भी मौत

सुप्रीम कोर्ट में बड़े वकीलों की मोनोपोली पर बहस, कौन हैं भारत के 10 सबसे महंगे वकील? देखें लिस्ट