

Maharashtra Politics Jayant Patil Shinde Meeting: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राकां शरदचंद्र पवार पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटिल की दो रोज पहले हुई मुलाकात पहले ही राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी बीच जयंत पाटिल गुरुवार को उप मुख्यमंत्री शिंदे से मिलने उनके सरकारी एकनाथ निवास नंदनवन पहुंच गए।
इन मुलाकातों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार शिंदे और पाटिल के बीच करीब 45 मिनट से अधिक समय तक चर्चा हुई। इस दौरान राकां शरदचंद्र पवार पार्टी के वरिष्ठ नेता जितेंद्र आव्हाड भी मौजूद थे।
हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इससे पहले जयंत पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की थी। उस समय वर्षा निवास पर अजीत पवार गुट के नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल की मौजूदगी से भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जयंत पाटिल ने स्पष्ट किया था कि वह इस्लामपुर नगर परिषद के नगराध्यक्ष की अयोग्यता से जुड़े मामले पर चर्चा करने गए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकात का सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल से कोई संबंध नहीं था तथा मुख्यमंत्री से केवल पांच मिनट की चर्चा हुई थी। अब एकनाथ शिंदे से उनकी नई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में फिर से अटकलों का दौर शुरू कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, जयंत पाटिल और एकनाथ शिंदे के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता जितेंद्र आव्हाड भी मौजूद रहे। हालांकि बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई, इसे लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। इसी कारण राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इससे पहले जयंत पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वर्षा निवास पर मुलाकात की थी। उस समय एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी थी। लगातार शीर्ष नेताओं के साथ हो रही इन बैठकों को लेकर विभिन्न राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।
अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ हुई नई बैठक के बाद राजनीतिक अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से बैठक के उद्देश्य या चर्चा के विषय को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ऐसे में इन मुलाकातों को लेकर राजनीतिक विश्लेषक और दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग अनुमान लगा रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इन बैठकों का कोई राजनीतिक असर सामने आता है या नहीं।