

Maharashtra Zilla Parishad Elections Update: महाराष्ट्र में लंबे समय से टल रहे जिला परिषद (ZP) और अन्य स्थानीय निकायों के चुनावों को लेकर आखिरकार एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव कराने को लेकर अपनी पूर्ण तैयारी जताई है। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में जिला परिषद के चुनाव इसी साल दिसंबर 2026 तक कराए जा सकते हैं। हालांकि, यदि ये चुनाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की अनिवार्य सीमा के तहत होते हैं, तो कई जिलों का चुनावी गणित और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।
महाराष्ट्र की स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं में नगर परिषद, नगर पंचायत, नगर निगम, जिला परिषद और पंचायत समितियां शामिल हैं। पिछले साल नवंबर और इस साल फरवरी के बीच अलग-अलग चरणों में कुछ जिलों यह चुनाव कराए गए थे। हालांकि, OBC आरक्षण कोटा तय सीमा से ज्यादा होने के कारण 20 जिला परिषदों और सैकड़ों पंचायत समितियों के चुनाव टाल दिए गए थे। अब इन चुनावों के आयोजन का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही के दौरान, राज्य सरकार ने 50% आरक्षण की सीमा का पालन करते हुए चुनाव कराने की अपनी तैयारी जाहिर की है। नतीजतन, इन चुनावों के साल के आखिर में यानी दिसंबर में होने की संभावना है।
राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनाव कराने के पक्ष में सकारात्मक रुख अपनाने के बाद लंबे समय से लंबित स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनावों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी राजनीतिक दलों, संभावित उम्मीदवारों और मतदाताओं की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे जिला परिषद चुनावों की दिशा और समय-सीमा तय होगी।
50% आरक्षण सीमा के कारण टले थे 20 जिलों के चुनाव
महाराष्ट्र में इसी साल फरवरी में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में 12 जिलों में जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान हुआ था। इनमें सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, रायगड, पुणे, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर शामिल है। हालांकि, 20 अन्य जिलों में जिला परिषदों और उनकी संबंधित पंचायत समितियों के चुनाव ओबीसी आरक्षण सीमा से अधिक होने की चिंताओं के कारण स्थगित कर दिए गए थे।
यदि दिसंबर में जिला परिषद चुनाव होते हैं तो ठाणे, पालघर, नासिक, धुले, नंदुरबार, जलगांव, अहिल्यानगर, जालना, बीड, नांदेड़, हिंगोली, अमरावती, अकोला, बुलढाणा, वाशिम, यवतमाल, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गड़चिरोली जिले में मतदान होगा।
50 प्रतिशत आरक्षण सीमा लागू होने का सबसे अधिक प्रभाव नागपुर जिला परिषद पर पड़ने की संभावना है। वर्तमान आरक्षण प्रारूप के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने 57 सीटों में से 33 सीटें आरक्षित की हैं। इनमें 15 सीटें ओबीसी, 10 अनुसूचित जाति (एससी) और 8 अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं।
यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, कुल आरक्षण 50 प्रतिशत तक सीमित रखा जाता है, तो 57 में से केवल 27 सीटें ही आरक्षित रखी जा सकेंगी। ऐसे में वर्तमान की 33 आरक्षित सीटों की संख्या घटकर 27 रह सकती है। इसका सबसे अधिक असर ओबीसी आरक्षण पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल ओबीसी के लिए आरक्षित 15 सीटें घटकर 10 रह सकती हैं। इससे नागपुर जिला परिषद सहित अन्य जिलों के राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है।