Gopichand Padalkar Helicopter Travel Fear 
सांगली

अजित पवार हादसे का खौफ: "हवा में उड़े होश", भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने बताया अपना डरावना अनुभव

Gopichand Padalkar Helicopter Travel Fear: भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने बताया कि अजित पवार हादसे के बाद उन्हें हवाई यात्रा से डर लगने लगा है। विखे पाटिल के साथ चर्चा में हुआ खुलासा।

अनिल सिंह

Ajit Pawar Plane Crash Impact: उपमुख्यमंत्री अजित  के विमान हादसे में हुए दुखद निधन को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन इस घटना का खौफ आज भी महाराष्ट्र के गलियारों और दिग्गज राजनेताओं के मन में साफ देखा जा सकता है। सांगली के कद्दावर भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर, जो राजनीतिक पटल पर अजित पवार के कट्टर विरोधियों में से एक माने जाते थे, उन्होंने हाल ही में अपना एक ऐसा अनुभव साझा किया है जिसने हवाई सफर की सुरक्षा और राजनेताओं के मन में बैठे डर को उजागर कर दिया है।

मिरज तालुका के बेलंकी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पडलकर ने खुलकर बताया कि कैसे हवाई यात्रा के दौरान अब उनके 'पेट में डर का गोला' उठने लगा है।

विखे पाटिल के साथ हवा में हुई 'वह' चर्चा

गोपीचंद पडलकर हाल ही में राज्य के कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के साथ एक हेलीकॉप्टर यात्रा पर थे। इस सफर के दौरान दोनों नेताओं के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो स्वाभाविक रूप से दिवंगत अजित पवार के विमान हादसे की ओर मुड़ गया। मंत्री विखे पाटिल ने इस दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि उनके बेटे और पूर्व सांसद सुजय विखे पाटिल ने अजित दादा की मौत के बाद से हेलीकॉप्टर और विमान से यात्रा करना पूरी तरह बंद कर दिया है।

पेट में उठा डर का गुबारपवार

पडलकर ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "जब मंत्री जी ने बताया कि उनके बेटे ने हवाई सफर छोड़ दिया है और हम उसी वक्त हवा में उड़ रहे थे, तो मेरे पेट में डर का गोला आ गया।" उन्होंने स्वीकार किया कि अजित पवार जैसे कद्दावर नेता की अचानक हुई मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि, पडलकर ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि "जत" क्षेत्र को पानी मिलने वाला है, इसलिए जनहित के कामों की जल्दबाजी में वे डर के बावजूद हेलीकॉप्टर से आने को मजबूर हुए।

नेताओं के दौरों का 'जोखिम भरा' सच

अजित पवार के हादसे के बाद महाराष्ट्र के कई मंत्री और विधायक अब निजी चार्टर्ड प्लेन या पुराने हेलीकॉप्टर्स के इस्तेमाल से कतरा रहे हैं। पडलकर का यह अनुभव इस बात को पुख्ता करता है कि राजनेताओं के व्यस्त दौरे और हवाई यात्राएं उतनी आसान नहीं होतीं जितनी दिखाई देती हैं। खराब मौसम और तकनीकी मानकों की कमी अब नेताओं के लिए एक बड़ा मानसिक तनाव बन गई है। पडलकर के इस बयान से स्पष्ट है कि 'अजित पर्व' के अंत ने सुरक्षित हवाई सफर की नीतियों पर फिर से विचार करने के लिए सबको मजबूर कर दिया है।

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