Veerpratap Newborn Sangli (फोटो क्रेडिट-X) 
सांगली

पैदा कर फरार हुई मां, अस्पताल स्टाफ ने 3 महीने तक कलेजे से लगाया, 'वीरप्रताप' की विदाई पर रो पड़ा पूरा अस्पताल

Veerpratap Newborn Sangli: सांगली सिविल अस्पताल के स्टाफ ने लावारिस नवजात को 3 महीने तक मां जैसा प्यार दिया। 'वीरप्रताप' नाम रखकर उसे भावुक विदाई दी गई और पुणे भेजा गया।

अनिल सिंह

Sangli Civil Hospital: महाराष्ट्र के सांगली जिले से मानवता और वात्सल्य की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। सांगली के शासकीय सिविल अस्पताल में एक नवजात, जिसे उसकी जन्मदात्री मां ने पैदा होते ही लावारिस छोड़ दिया था, उसे अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों ने तीन महीनों तक अपने कलेजे से लगाकर पाला।

अस्पताल के कर्मचारियों और इस मासूम के बीच का यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि विदाई के समय पूरा अस्पताल स्टाफ फफक-फफक कर रो पड़ा।

मां छोड़ गई, पर देवदूतों ने थाम लिया हाथ

घटनाक्रम के अनुसार, 26 नवंबर 2025 को एक महिला ने सिविल अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया और अगले ही दिन चुपके से फरार हो गई। जन्म के समय बच्चे की स्थिति नाजुक थी, उसे हर्निया जैसी गंभीर समस्या थी। अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल केंद्र (SNCU) के डॉक्टरों ने न केवल उसका सफल ऑपरेशन किया, बल्कि उसे 15 दिनों तक आईसीयू में रखकर नई जिंदगी दी। जब मां का कोई पता नहीं चला, तो अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों ने खुद उसकी 'मां' बनने का फैसला किया।

"वीरप्रताप": अस्पताल का लाड़ला और उसका नामकरण

पिछले तीन महीनों से यह बच्चा सांगली जिला अस्पताल के वार्ड की रौनक बना हुआ था। हर नर्स उसे अपनी गोद में खिलाती और डॉक्टर पिता जैसा स्नेह देते। जब अदालत के आदेशानुसार उसे आगे की देखभाल के लिए पुणे के शिशु गृह भेजने का समय आया, तो स्टाफ ने उसे किसी अजनबी की तरह नहीं, बल्कि अपने घर के बच्चे की तरह विदा किया। विदाई से पहले अस्पताल में पालना सजाया गया, रंगोली बनाई गई और पूरे उत्सव के साथ उसका नामकरण किया गया। स्टाफ ने सर्वसम्मति से उसका नाम 'वीरप्रताप' रखा।

आंसुओं के साथ विदाई: स्नेह का अनोखा संगम

वीरप्रताप की विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक था। जिस पालने में वह तीन महीने रहा, उसे गुब्बारों से सजाया गया था। जैसे ही उसे पुणे भेजने के लिए एम्बुलेंस की ओर ले जाया गया, SNCU की नर्सों और महिला डॉक्टरों की आंखों से आंसू छलक पड़े। तीन महीने तक उसे दूध पिलाने, लोरी सुनाने और रात-भर जागकर उसकी देखभाल करने वाली 'मदर्स इन यूनिफॉर्म' के लिए यह बिछड़ना किसी वियोग से कम नहीं था। वीरप्रताप भले ही अपनी जैविक मां से महरूम रहा, लेकिन वह अपने पीछे सैकड़ों मांओं का आशीर्वाद लेकर पुणे रवाना हुआ।

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