Supreme Court Sambhal Violence Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2024 संभल हिंसा मामले में आज एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत जारी हिरासत रद्द कर दिया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर दस लाख का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने कहा कि यूपी सरकार ने गैर-कानूनी तरीके से NSA लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए अफरोज को जमानत दी है। मुल्ला अफरोज की तरफ से 2024 के संभल हिंसा मामले में यूपी सरकार द्वारा NSA लगाए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने सरकार द्वारा पुलिस हिरासत में अफरोज के कथित कबूलनामें को आधार बनाकर उसे जेल में बंद रखने को गैर-कानूनी बताया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस हिरासत में अफरोज के कथित तौर पर दिए गए कबूलनामे के आधार पर उसे प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) का आदेश पास नहीं कर सकती है। गैर-कानूनी प्रिवेंटिव डिटेंशन आदेश पास करने के लिए सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी को अन्य संबंधित परिस्थितियों पर भी विचार करना चाहिए था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मुल्ला अफरोज के मामले में अधिकारियों ने इन परिस्थितियों पर विचार नहीं किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया।
मुल्ला अफरोज संभल हिंसा में आरोपी है। संभल में 2024 में शाही जामा मस्जिद मामले में कोर्ट के सर्वे के आदेश के बाद हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। उसे घटना के लगभग 54 दिन बाद, कथित तौर पर पुलिस हिरासत में दिए गए कबूलनामे के आधार पर अफरोज को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि बाद में उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट से बेल मिल गई थी।
इसके बाद 13 अक्टूबर, 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत डिटेंशन ऑर्डर पास किया गया था। डिटेंशन ऑर्डर को बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखा, जिसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में अफरोज ने दलील दी कि पुलिस ने खुद हिंसा के दौरान गोलीबारी की थी और इसकी उचित जांच नहीं की गई थी। उसने इस संबंध में एक प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दाखिल करने की छूट मांगी।