Ratnagiri LPG Crisis 45 Days Waiting (फोटो क्रेडिट-X) 
रत्नागिरि

25 नहीं 45 दिनों में मिल रहे हैं LPG सिलेंडर, वितरकों पर फूटा लोगों का गुस्सा, प्रशासन झाड़ रहा पल्ला

Ratnagiri LPG Crisis 45 Days Waiting: रत्नागिरी में एलपीजी सिलेंडर के लिए वेटिंग पीरियड बढ़कर 45 दिन हो गया है। वैश्विक संकट के बीच वितरकों की मनमानी से जनता परेशान है।

अनिल सिंह

Maharashtra LPG Shortage 2026: रत्नागिरी जिले में एलपीजी (LPG) गैस संकट ने अब विकराल रूप ले लिया है। पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका युद्ध और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के बंद होने से उपजे वैश्विक ईंधन संकट का सीधा प्रहार कोंकण के रसोई घरों पर हुआ है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर दो सिलेंडरों के बीच 25 दिनों का अंतराल तय किया था, लेकिन रत्नागिरी में वितरकों के 'मनमाने प्रबंधन' के कारण यह प्रतीक्षा समय 40 से 45 दिनों तक पहुंच गया है। इस देरी ने आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है, जबकि प्रशासन अब भी आपूर्ति सुचारू होने का दावा कर पल्ला झाड़ रहा है।

रत्नागिरी के शहरी क्षेत्रों में 40 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिनों के बाद ही सिलेंडर मिल पा रहे हैं। इस 'अलिखित' नियम ने गृहिणियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। लोग गैस वितरकों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां से केवल 'स्टॉक की कमी' का बहाना मिल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन जहां एक ओर नियंत्रण कक्ष स्थापित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर वितरकों पर लगाम कसने में विफल साबित हो रहा है।

प्रशासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत

जिला कलेक्टर मनुज जिंदल ने हाल ही में समीक्षा बैठक कर निर्देश दिए थे कि सभी गैस एजेंसियां अपने बाहर बुकिंग अंतराल के बोर्ड लगाएं और जनता की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर (7057222233) जारी किया। हालांकि, जिला आपूर्ति अधिकारी का कहना है कि जिले में प्रतिदिन 7,500 सिलेंडरों की आपूर्ति हो रही है, जो मांग (7,200) से अधिक है। अधिकारी इस देरी का कारण 'पैनिक बुकिंग' बता रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि यदि आपूर्ति सरप्लस है, तो आम आदमी को डेढ़ महीने तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?

व्यावसायिक आपूर्ति बंद, होटल उद्योग पर ताला

केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद जिले में व्यावसायिक (Commercial) गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई है। इसका सीधा असर रत्नागिरी के पर्यटन और होटल व्यवसाय पर पड़ा है। कोंकण की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है, लेकिन गैस न होने के कारण कई छोटे भोजनालय बंद होने की कगार पर हैं। प्रशासन का तर्क है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन हकीकत में घरेलू उपभोक्ता भी 45 दिनों की लंबी वेटिंग से त्रस्त हैं।

वितरकों की मनमानी और जनता का आक्रोश

रत्नागिरी के नागरिकों का आरोप है कि वितरक जानबूझकर कृत्रिम गैस संकट पैदा कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा गठित की गई जांच टीमें केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। जब स्थानीय स्तर पर वितरकों से पूछा जाता है, तो वे बुकिंग में देरी के लिए पीछे से आने वाली सप्लाई को जिम्मेदार ठहराते हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल निर्देश दे रहा है, लेकिन उन वितरकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही जो नियमों का उल्लंघन कर लोगों को 45 दिनों तक भूखा रख रहे हैं।

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