MNS प्रमुख राज ठाकरे और ज्ञानेश कुमार (सोर्सः एआई)
महाराष्ट्र

SIR Controversy: राज ठाकरे ने की एसआईआर रद्द करने की मांग, बोले- EVM हटाकर बैलेट पेपर से करो चुनाव

Raj Thackeray SIR Demand: राज ठाकरे ने SIR प्रक्रिया रद्द करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने विपक्षी दलों से EVM के बजाय बैलेट पेपर के लिए आंदोलन की अपील की।

आलोक उमाकृष्ण

SIR Cancellation Demand Ballot Paper Election: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के सत्यापन की इस प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।

ठाकरे ने सभी विपक्षी दलों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय कागजी मतपत्र से मतदान की व्यवस्था बहाल करने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया।

MNS प्रमुख राज ठाकरे की मांग

राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में SIR में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने के बाद ही नई सत्यापन प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। ठाकरे ने SIR को लेकर गंभीर सवाल उठाए जाने का दावा भी किया।

महाराष्ट्र में SIR 2026 के तहत मतदाता सूची के सत्यापन और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR 2026 की प्रारूप मतदाता सूची और दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था उपलब्ध है।

विपक्षी दलों से बैलेट पेपर के लिए आंदोलन की अपील

राज ठाकरे ने विपक्षी दलों से एकजुट होकर भविष्य के चुनावों में EVM के स्थान पर पारंपरिक कागजी मतपत्र से मतदान की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करने की अपील की। उन्होंने अपने बयान में इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली को लेकर जनता के भरोसे पर सवाल उठाए और बैलेट पेपर व्यवस्था की वापसी की मांग रखी।

CEC ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना

राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। 24 सितंबर को ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और निर्वाचन आयोग के कामकाज की जांच की मांग भी की थी।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने हाल में कहा है कि पिछले एक साल में आयोग द्वारा लिए गए फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसलिए आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर सामने आए राजनीतिक दावों और आयोग के आधिकारिक रुख में अंतर मौजूद है।

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