पनवेल महानगरपालिका (pic credit; social media) 
रायगड

Raigad: नामांकन वापसी के बाद पनवेल में बदले समीकरण, 18 जिप व 46 पंस उम्मीदवार मैदान में

Panvel में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। नामांकन वापसी के बाद अब भाजपा और शेकाप के बीच सीधी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

अपूर्वा नायक

Navi Mumbai News In Hindi: पनवेल तहसील में स्थानीय स्वराज्य संस्था के चुनाव की तस्वीर अब साफ हो गई है और - राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

यहां पर जिला परिषद के 8 गुट के लिए 18 और पंचायत समिति के 16 गण के लिए 46 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

39 में से 20 उम्मीदवारों ने नामांकन लिया वापस

खास बात यह है कि जिला परिषद की 7 सीटों पर भाजपा और शेकाप के बीच सीधी टक्कर होगी, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि पनवेल तहसील में असली लड़ाई 'कमल' और 'सीटी' के बीच होगी। गौरतलब है कि 8 जिला परिषद सीटों के लिए 39 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र भरा था, जिनमे से एक नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज हो गया था। जबकि 20 लोगों ने अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया। इसलिए अब 18 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। वहीं पंचायत समिति के 16 गणों के लिए 83 नामांकन पत्र आए थे, जिनमें से 2 नामांकन पत्र खारिज हो गए थे, वहीं 35 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया, जिसके चलते अब 46 उम्मीदवार मैदान में हैं।

  • पनवेल तहसील में प्रत्येक समूह में स्थानीय समीकरण बदल रहे हैं। वावंजे के गट में शेकाप का दबदबा है, लेकिन यहां पर भाजपा की कमला देशेकर ने शेकाप को कड़ी टक्कर दे रही है। पनवेल तहसील के जिला परिषद और पंचायत समिति के इस चुनाव में भाजपा को विधायक प्रशांत ठाकुर और महेश बालदी लीड कर रहे है। जबकि शेकाप की पूरी जिम्मेदारी पूर्व विधायक बलराम पाटिल के कंधों पर है।
  • वहीं शेकाप से भाजपा में शामिल हुए जे एन म्हात्रे और प्रीतम म्हात्रे से भाजपा को फायदा होने की उम्मीद है। शिवसेना शिंदे गुट के प्रत्याशियों ने अपने नामांकन को वापस लेकर महायुति वोटों में बंटवारा होने से बचा लिया है। चर्चा है कि इससे भाजपा को बड़ा राजनीतिक फायदा होगा।

नेरे क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान से हटा

पनवेल में राजनीतिक गणित बदलने से शेकाप का गढ़ माने जाने वाले केलवणे गट में भाजपा का पड़ला भारी है। पलस्पे में कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शेकाप को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, जिसकी वजह से यहां पर शेकाप को बड़ा नुकसान हुआ, जिससे यहां राजनीतिक उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं।

कुछ ऐसी ही तस्वीर इस बार गव्हाण भी दिखाई दे रही है। वहीं वावेघर और वडघर में शेकाप और भाजपा के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। नेरे में निर्दलीय प्रत्याशी के हटने से भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है, वहीं पाली-देवद सीट को फिर से जीतने के लिए भाजपा ने कमर कसी है।

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