सभी मजदूर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के रहने वाले हैं।
मजदूरों को छह महीने पहले अधिक मजदूरी का लालच देकर लाया गया था।
न्यूनतम मजदूरी न देने, मारपीट और शोषण के आरोप लगाए गए।
सामाजिक संस्था 'अंकुर' की पहल पर बचाव अभियान चलाया गया।
Stone Quarry Nine Bonded Labourers: ठाणे जिले के मानगांव तहसील के चराई बुद्रुक में स्थित एक पत्थर की खदान से नौ बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के रहने वाले इन मजदूरों को छह महीने पहले सुदाम राठौड़ नाम के एक लेबर कॉन्ट्रैक्टर (मुकादम) द्वारा मानगांव लाया गया था।
उसने उन्हें ज्यादा मजदूरी और कम मेहनत वाले काम का लालच दिया था। लेकिन, खदान में उनसे उनकी शारीरिक क्षमता से कहीं ज्यादा काम करवाया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि पत्थर की खदान में काम करने वाले नौ मजदूरों को कथित तौर पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ रहा था। उनसे तय न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही थी और उनकी शारीरिक क्षमता से अधिक काम कराया जा रहा था।
विरोध करने पर उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज किए जाने के आरोप हैं। इतना ही नहीं, मजदूरों को चिकित्सा सुविधा और अन्य बुनियादी जरूरतों से भी वंचित रखा गया था। उनके परिजनों से संपर्क करने पर भी रोक लगा दी गई थी। इस तरह मजदूरों को बाहरी दुनिया से अलग रखकर खदान में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
नौ मजदूरों को खदान से मुक्त कराने के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। तला पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
खदान में मजदूरों से जबरन काम कराने और उनके शोषण से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बचाव अभियान को पेन (Pen) स्थित सामाजिक संस्था 'अंकुर' की संस्थापक डॉ. वैशाली पाटिल की पहल पर चलाया गया। इसमें जिला प्रशासन, मानगांव के उप-विभागीय अधिकारी (SDO), तहसीलदार, श्रम विभाग, तला पुलिस और ठाणे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पैनल वकील एडवोकेट तृप्ति पाटिल ने सहयोग किया।